एक होनहार की प्रधानमंत्री से पुकार

नई दिल्ली((28 जुलाई): यूपी में तमाम ऐसी प्रतिभाएं है जिनका भविष्य गरीबी व मुफलिसी के चलते दांव पर लगा है। तमाम प्रभिताओं के बावजूद गरीबी इनके कदम रोक रही है। इंजीनियर बनने का सपना संजोए अजय कुमार जिसने देश के तमाम नामी गिरामी इंजीनियरिंग संस्थानों की प्रवेश परीक्षा तो पास कर ली, लेकिन पैसे के अभाव में उसका दाखिला नहीं हो पाया। अब उसके पास अंतिम मौका 30 जुलाई है अगर उसे इस दौरान 16 हजार न मिले तो उसका एडमिशन एक बार फिर रुक जायेगा और वह भी अपने पिता की तरह मजदूरी करने को विवश होगा। 

जिले के सदर तहसील के कैबिनेट मंत्री राजकिशोर सिंह के गांव से सटे हुए गांव साहूपार का रहने वाला अजय कुमार ने वर्ष 2015 में इन्टरमीडियट की परीक्षा पास कर ली। बिना कहीं कोचिंग किये ही जे.ई. मेंस की परीक्षा पास किया और उसको गुरदासपुर में बेंट इंजीनियरिंग कालेज में दाखिले का मौका मिला। जिसके लिए उसे 3 लाख 74 हजार की आवश्यकता थी । उस दौरान सेना के रिटायर्ड कर्नल के.सी. मिश्र ने दाखिले के लिए 25 हजार रूपये की सहायता की, लेकिन आगे की पढाई जारी रखने के लिए पास में पैसे न होने से वह वहां से इंजीनियरिंग की पढाई छोड़ कर वापस चला आया। फिर इसने यूपीटीयू की प्रवेश परीक्षा पास कर 200 अंक हासिल किया और उसे प्रदेश का नामी गिरामी कॉलेज मिला, लेकिन फिर पैसे के अभाव में उसका दाखिला नहीं हो पाया, उसने फिर हार नहीं मानी और केआईआईटी में 885 रैंक हासिल किया। इसके अलावा एमएसटी मुंबई की प्रवेश परीक्षा में 120वीं रैंक हासिल किया लेकिन हर बार उसे पैसे के अभाव में मात ही खानी पड़ी। इस बार उसे आईएमई में 810वीं रैंक मिली है जिसके तहत उसको गोरखपुर में एयरक्रॉफ्ट मेंटिनेंस इन्जीनिरिंग कॉलेज आवंटित हुआ है।

इस बार उसे दाखिले के लिए 30 जुलाई तक समय मिला है जिसके लिए उसे 16 हजार रूपये की आवश्यकता है। अगर इस दौरान इसको इतने पैसे न मिले तो उसका भविष्य चौपट हो जायेगा और वह अपने पिता की तरह एक मजदूर बनकर रह जायेगा। इसके आलावा उसे पढाई पूरी करने के लिए भी लगभग 3.50 लाख रुपयों की जरूरत होगी लेकिन अभी तो बस दाखिले का सवाल है उसके सामने मुहं बाए खड़ा है। अजय को जब हर जगह निराशा हाथ लगी तो वह लोगों से उसके दाखिले में सहयोग करने की की अपील की। इस होनहार ने बताया की उसका पैसे के अभाव के चलते देश के कई नामी गिरामी इंजीनियरिंग संस्थानों में दाखिला होते होते रह गया। गरीबी और परिवार में आर्थिक तंगी की वजह से उसका इंजीनियर बनने का सपना शायद भी पूरा न होने पाये।

बट्टे बनाने का काम करते थे लेकिन इसी बीच उन्हें टीबी की गंभीर बीमारी ने जकड लिया और पिछले कुछ माह से वह इस बीमारी की वजह से काम करने योग्य नहीं रह गये है। जिसके वजह से उनके 8 लोगों के परिवार में खाने के भी लाले पड़े है। अजय के पिता का कहना है की घर में खाने ले लाले पड़े है ऐसे में अजय के दाखिले की बात तो बहुत दूर की बात है।