यहां नहीं मनाया जाता अक्षय तृतीया का त्योहार, जानिए क्यों?

नई दिल्ली (9 मई) :  देश-विदेश में हिंदू अक्षय तृतीया का पर्व मना रहे हैं। लेकिन उत्तर प्रदेश का एक छोटा सा कस्बा ऐसा भी है जहां बीती दो सदियों से इस त्योहार को नहीं मनाया गया। इसके पीछे एक दुखद कहानी है। इस कस्बे का नाम है तालबेहट ये झांसी और ललितपुर के बीच में स्थित है। इस प्रथा का पालन मोर प्रह्लाद के शासनकाल (1802-1842) से होता आ रहा है।

बताया जाता है कि यहां अक्षय तृतीया का पर्व मनाने के पत्ते चुनने गईं महिलाओं से तालबेहट के किले में रेप किया गया था। जिन्होंने ये दुष्कर्म किया वो शासक के ही आदमी थे। तभ विरोध स्वरूप इस गांव में अक्षय तृतीया का त्योहार नहीं मनाया गया। तभी से ये परंपरा चली आ रही है। 

इस गांव में अक्षय तृतीया का त्योहार बेशक बीती दो सदी से नहीं मनाया जा रहा। लेकिन यहां एक और परंपरा देखी जाती है। वो पुरुषों की ओर से महिलाओं के पैर छूने की। इस परंपरा में ये नहीं देखा जाता कि महिला किस जाति की है।

सीमेंट के जंगल बेतहाशा बढ़ने का असर तालबेहट पर भी देखा जा सकता है। यहां इमारतों का निर्माण तालबेहट के किले को भी ढकता जा रहा है।