कभी 1 बच्चे तक नहीं थे इस दंपति के, आज हैं 51 बच्चे

लखनऊ(8 दिसंबर): उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर के एक दंपति के साथ कुछ ऐसा हुआ कि उनकी जिंदगी की दिशा ही बदल गई। 'टाइम्स ऑफ इंडिया' के मुताबिक किसान पति-पत्नी को जब कोई संतान नहीं हुई तो उन्होंने 1990 में एक दिव्यांग बच्चे को गोद लेने का फैसला किया। लगभग तीन दशक के बाद आज वे 51 बच्चों के माता-पिता हैं।

- शामली के कुदाना गांव की मीना राणा की शादी 1981 में बाघपत के वीरेंद्र राणा से हुई थी। शादी के 10 साल बाद भी उनको कोई संतान नहीं हुई। बाद में पता चला कि मीणा कभी मां नहीं बन सकतीं। 

- दोनों साल 1990 में शुक्रताल में आकर रहने लगे। यहां उन्होंने एक साल के बच्चे को गोद लिया और उसका नाम रखा मांगेराम। लेकिन उनकी किस्मत ने एक बार फिर मजाक किया और पांच साल बाद मांगेराम चल बसा। दंपति ने उम्मीद नहीं छोड़ी और बेसहारा बच्चों को अपने साथ लाकर रखने लगे। 

- उन्हें शुक्रताल में एक आठ बीघा जमीन डोनेशन में मिली जिसपर वह अनाथाश्रम चलाते हैं। इसी में एक स्कूल भी है। इस वक्त यहां 46 बच्चे हैं। कई ऐसे रहे जो बड़े होकर, नौकरी करने बाहर चले गए। कइयों की शादी हो गई। यह सब पूरा किया जा सका डोनेशन्स की मदद से। 

- मीना कहती हैं कि उन्हें इस बात से फर्क नहीं पड़ता कि बच्चे हिंदू हैं या मुस्लिम। वह कहती हैं, 'मुझे सिर्फ इतना पता है कि ये मेरे बच्चे हैं। हमारा ध्यान इनकी पढ़ाई पर है।' इस वक्त यहां रह रहे बच्चों में से 19 लड़कियां हैं और 27 लड़के। इनमें से कई दिव्यांग हैं। अनाथाश्रम में एक अच्छी रसोई, बड़े कमरे और एक बड़ा सा खेल का मैदान है।

- वीरेंद्र ने बताया कि शुक्रताल ग्राम पंचायत ने उन्हें बड़ा प्लॉट दिया। उन्होंने बताया कि अपनी कई बड़ी जरूरतों के लिए उन्हें चंदे पर निर्भर रहना पड़ता है। उनके पड़ोसी उन्हें गेहूं जैसा जरूरी सामान देते हैं। 

- यहां रही 22 साल की ममता अब जिले के एक कॉलेज में पोस्ट ग्रैजुएट कर रही हैं। वह कहती हैं कि उन्हें नहीं पता कि अगर मीना और वीरेंद्र उनका ध्यान नहीं रखते तो उनका भविष्य क्या होता। ममता अब अनाथाश्रम में ही काम करती हैं। शुक्रताल के प्रधान सुशील शर्मा का कहना है कि मीना और वीरेंद्र जो कर रहे हैं, वह बहुत से लोग नहीं कर सकते।