5 दिन हिंदू तो 2 दिन मुसलमान बनकर जीता है यह बच्चा

 

नई दिल्ली (4 जून): शायद आपको इस खबर का शीर्ष पढ़कर यह लग रहा होगा कि यह कोई मजाक है, लेकिन ऐसा नहीं है। 2002 के गुलबर्ग सोसाइटी के दंगों में विवेक नाम का एक बच्चा सब कुछ खो चुका था। तभी उसकी जिंदगी में विक्रम नाम का एक शख्स आया, जिसने अपनी पत्नी वीना के साथ मिलकर उसे अपनाने का फैसला लिया। ये परिवार उस बच्चे को अपने बेटे की तरह पाल रहा था कि 2008 में उसके बायोलॉजिकल पेरेंट्स आ पहुंचे और उन्होंने विवेक को अपना मुजफ्फर बताकर उसे वापस लौटाने की बात की।

विवेक को लेकर हिन्दू और मुस्लिम परिवार में लड़ाई शुरू हो गई चूंकि अब विवेक को घर लाने वाले विक्रम इस दुनिया में नहीं हैं, तो उनकी पत्नी वीना ने इस मामले में अपील दाखिल कर दी। 2013 में ये मामला गुजरात हाईकोर्ट पहुंचा, तो फैसला सुनाया गया कि बच्चे को फिलहाल उसके बायोलॉजिकल पेरेंट्स को नहीं दिया जा सकता। बच्चा अपने भविष्य का फैसला खुद ले सकता है। हालांकि, बायोलॉजिकल पेरेंट्स 6 महीने तक हर रविवार को विवेक से मिल सकते हैं।

बच्चे की बायोलॉजिकल मां जेब्बुनीसा के वकील ने इस फैसले के खिलाफ फिर से अपील की, जिस पर कोर्ट ने फैसला सुनाया है कि विवेक सोमवार से शुक्रवार तक वीना के पास रहेगा और शनिवार और रविवार को सलीम और जेब्बुनीसा के पास। विवेक ने इस साल 10वीं की परीक्षा दी है और अब अंतिम फैसला उसी का होगा कि वह क्या चाहता है?