पानी के लिए साल भर व्रत रखता है यह पक्षी, सिर्फ इस नक्षत्र का पीता है पानी

 

नई दिल्ली(29 जून): हिंदू पंरपरा में निर्जला व्रत रखा जाता है, लेकिन क्या आपने कभी किसी पक्षी के बारे में सुना है जो सालभर पानी पीने के लिए व्रत रखता है। ये पक्षी सिर्फ स्वाति नक्षत्र में बरसने वाले पानी से ही अपनी प्यास बुझाता है। अगर यह नक्षत्र बिन बरसे चला जाए तो यह पक्षी साल भर बिना पानी पीये रहता है। ऐसा कठिन व्रत रखने वाले उस पक्षी का नाम है चातक।

करीब सवा फीट लंबा काले सफेद रंग का यह पक्षी विश्व के सभी गरम देशों में पाया जाता है। कोयल की तरह भी यह अपना घोसला नहीं बनाता बल्कि दूसरी चिडिय़ों के घोसलों में अपना अंडा रख देता है। जिनसे समय आने पर बच्चे निकल कर उड़ जाते हैं। इसका भोजन कीड़े, मकोड़े और इल्लियां हैं। चातक के ही कुल का एक और पक्षी है पपीहा जिसके बारे में भी यह कहा जाता है कि वह भी केवल स्वाति नक्षत्र में ही बारिश के पानी से अपनी प्यास बुझाता है।

बरसात के मौसम में कोयल की कूक के साथ ही'पी कहां, पी कहां जैसी आवाज करने वाला यह पक्षी और कोई नहीं, पपीहा ही होता है। पपीहा देखने में कबूतर जैसा लगता है। इसकी आंखें पीले रंग की होती हैं और शरीर का ऊपरी हिस्सा हल्के भूरे रंग का होता है। इसकी चोंच और इसके पैर पीले रंग के होते हैं, जिसमें थोड़ा हरा रंग लिए हल्के-हल्के धब्बे होते हैं। इसकी लम्बाई 15 से 19 इंच तक की हो सकती है। नर और मादा में बहुत कम अंतर होता है। देखने में दोनों एक जैसे ही होते हैं।

माना जाता है कि यह इस तरह की आवाज कर अपने प्रियतम को बुलाता है। एक तरह से यह मानसूनी बारिश आने का संकेत देता है। भारत पाकिस्तान, बांग्लादेश व श्रीलंका में पाए जाने वाले इस पक्षी की आवाज कोयल से भी ज्यादा सुरीली मानी गई है। ऐसा माना जाता है कि यह पक्षी बारिश के दौरान आसमान की ओर मुंह करके पानी पीकर अपनी प्यास बुझाते हैं।