संतुष्ट है भीख मांगने के 'प्रोफेशन' से सिद्धांत, हर महीने कमाता है 30,000 रुपए

नई दिल्ली (13 फरवरी) :  बिहार के गया का रहने वाला सिद्धांत पोलियो से ग्रस्त है। वो अपने गुज़ारे के लिए कोई रोज़गार नहीं चाहता। ना ही वो अपनी विकलांगता के लिए कोई सरकारी मदद चाहता है। इसकी जगह उसने एक और पेशा चुनने का फैसला किया। ये पेशा है 'भीख मांगने का'। इस पेशे से वो बहुत खुश हैं।  

सिद्धांत ने कहा, "भीख मांगने से उसे हर महीने 30 हज़ार रुपये मिल जाते हैं। फिर मैं क्यों बिहार सरकार की ओर से दिव्यांगों (विकलांग) को दी जाने वाली 600 रुपये महीना की मदद स्वीकार करूं। मैं हर दिन 1000 रुपए से कम नहीं कमाता। वो भी बिना कोई काम किए। मैं जिस हाल में हूं, उसमें खुश हूं। मैं भविष्य या अतीत की नहीं सोचता।"    

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक सिद्धांत की बचपन में दायीं टांग पोलियो से ग्रस्त हो गई थी। सिद्धांत की मां ने मिट्टी के दिए बनाकर परिवार का गुज़ारा किया। ऐसे में सिद्धांत के इलाज के लिए जब सभी संभावनाएं ख़त्म हो गईं तो उसने भीख मांगकर मां की आर्थिक मदद करना शुरू कर दिया।

सिद्धांत अपने काम को पूरे प्रोफेशनल ढंग से अंजाम देता है। वो हर दिन 200 रुपए किराए पर लाउडस्पीकर से फिट एक रिक्शा लेता है। जब सिद्धांत दिन में 1200 रुपए भीख से जुटा लेता है तो वो पैक अप कर घर के लिए रवाना हो जाता है। इसमें से 200 रुपए वो रिक्शावाले को देता है।