महाराष्ट्र: पुणे में पब की सुरक्षा करती हैं महिला बाउंसर


न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली ( 11 नवंबर ): अभी तक आपने बार में पुरुष बाउंसर ही देखें होंगे, लेकिन पुणे के बार में महिला बाउंसर भी काम करती हैं। पुणे की रहने वाली 31 साल की रेखा सुतार भी उन्हीं में से एक हैं। रेखा सुतार ने बताया कि पहली बार वह जब बाउंसर की यूनिफॉर्म पहनी तो उन्‍हें बहुत अजीब लगा। उन्होंने बताया कि वह अपने जीवन में कभी भी सलवार कमीज के अलावा कोई और ड्रेस नहीं पहनी थी। वह अपने घर से ट्राउजर और शर्ट पहनकर बाहर निकलीं तो पड़ोसी उन्हें घूर रहे थे। उन्होंने कहा कि शुरुआती दिनों में वह असहज महसूस करती थीं, लेकिन अब उनके अंदर आत्म विश्वास आ गया है।

रेखा ने एक अंग्रेजी अखबार से बातचीत में बताया कि वह स्वामिनी लेडी बाउंसर्स में काम करती हैं। उन्होंने कहा कि इस लेडी बाउंसर्स फर्म की एक पूर्व ब्यूटिशन अमिता कदम ने दो साल पहले शुरूआत की थी। इसमें अभी पचास लेडी बाउंसर्स काम कर रही हैं। ये सभी पुणे के पब और आयोजनों में सुरक्षा का काम करती हैं। पब और कार्यक्रम में सुरक्षा के दौरान महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार करने वालों को सबक सिखाने के साथ नशे में हो जाने वाली महिलाओं की मदद भी करती हैं।

फर्म की मालिकन अमिता ने बताया, 'मेरी बहन के पति एक बाउंसर हैं। मैं उनके काम की बहुत प्रशंसक थी। मैंने कभी भी फीमेल बाउंसर्स के बारे में नहीं सुना था। वहीं मैंने यह भी पाया कि बार जाने वाली फीमेल, मेल बाउंसर्स के साथ खुद को असहज महसूस करती हैं, इसलिए मैंने एसएलबी की शुरुआत की। उन्होंने बताया कि इस काम में उनकी सास और पति ने उनकी बहुत मदद की। हालांकि महिलाओं को फीमेल बाउंसर के लिए तैयार करना बहुत बड़ी चुनौती थी। सबसे बड़ी परेशानी यह आई कि महिलाओं को देर रात तक काम करना पड़ता है।

अमिता ने कहा कि इन महिलाओं को सेल्फ डिफेंस, बातचीत और मैनेजमेंट स्किल की ट्रेनिंग दी जाती है। इस कारण महिलाएं खुद को सुरक्षित रखने के साथ ही दूसरों की सुरक्षा भी आसानी से करती हैं। उनके पास हर महीने लगभग बीस इवेंट्स के लिए कॉल आती हैं जिनमें लेडी बाउंसर्स की मांग की जाती है।

लेडी बाउंसर्स ने अंग्रेजी अखबार को बताया कि वे अपने काम से बहुत खुश हैं। उन्हें बहुत सम्मान मिलता है। इसके अवाला पब में ड्यूटी करने के लिए उन्हें हर महीने 10,000 से 15,000 रुपये और दूसरे इवेंट्स में काम करने के 8000 से 10,000 रुपये वेतन मिलता है। उन्हें आठ घंटे की ड्यूटी करनी पड़ती है।