जानें कैसे चलता है पीस चैनल और कहां से होती हैं फंडिंग

दीपक दुबे, मुंबई (7 जुलाई): डॉक्टर से इस्लामिक उपदेशक बने जाकिर नाईक की स्पीच जहां करोड़ों लोग सुनते हैं, उन्हें फॉलो करते हैं पर बांग्लादेश के आतंकी हमले के बाद और हैदराबाद के आईएसआईएस के मॉड्यूल के खुलासे के बाद जाकिर नाईक की हेट स्पीच ने विवाद पकड़ लिया है। इस विवादित जाकिर नाईक का हथियार उसका पीस चैनल बताया जाता है, जिसके जरिए वो अपना जहर करोड़ों लोगों तक पहुंचता है। अखीर ये पीस चैनल चलता कैसे है, यह चैनल किस देश से ऑपरेट होता है और कहां से होती है इसको फंडिंग।

एक तरफ जहां पूरी दुनिया आतंक से लड़ने के लिए तैयार है। आईएसआईएस जैसे खूंखार आतंकी संगठन को जड़ से खत्म करने की कोशिश की जा रही है और अगर दुनिया की बड़ी आतंकी घटनाओं के आतंकी ज़ाकिर नाईक को अपना गुरु बताएंगे तो हंगामा होना लाज़िमी है। इन खबरों के बाद अब देश में जाकिर नाईक के भाषणों औऱ उनके संगठन के आतंकी कनेक्शन की जांच की मांग शुरू हो गई है। जाकिर नाइक का सबसे बड़ा हथियार उनका पीस टीवी बताया जाता है।

कैसे चलता है पीस टीवी? - दुबई से बिना फायदे के 24 घंटे प्रसारित होता है - पीस टीवी के सारे प्रोग्राम अंग्रेज़ी में प्रसारित होते हैं - 2006 में पीस टीवी 200 से ज़्यादा देशों में प्रसारित होता था - एशिया, अफ्रीका, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया, नॉर्थ अमेरिका में सबसे ज़्यादा प्रसारण

जानकार कहते हैं कि किसी भी चैनल को चलाने के लिए करोड़ों रुपए की ज़रूरत होती है। ऐसे में ये इंटरनेशनल चैनल बिना किसी विज्ञापन के कैसे चल सकता है। कहा जाता है कि पीस टीवी को चलाने के लिए इन देशों से फंडिंग होती है।

इन देशों से होती है पीस टीवी को फंडिंग - सऊदी और ब्रिटेन से काफी पैसा चैरिटी में आता है - 2008 से 2015 के बीच पीस टीवी को 72 करोड़ रुपए दान में मिले - 2011 में ही पीस टीवी के बांग्ला चैनल को 4 मिलियन पाउंड दान में मिले थे

इसके अलावा जिन देशों में इस चैनल को चलाने के लिए लाइसेंस नहीं है। वहां डॉ ज़ाकिर नाईक की स्पीच पहुंचाने के लिए इंटरनेट का इस्तेमाल किया जाता है। भारत में भी डाउनलिंक न होने के बावजूद ये चैनल देश के कई शहरों में आज भी दिखाया जाता है। ऐसे में चैनल की फंडिंग पर सवाल उठना लाज़िमी है।

पीस टीवी लाइव इवेंट्स, बड़ों और युवाओं के लिए प्रोग्राम और बच्चों के लिए शैक्षिक कार्यक्रमों को भी प्रसारित करता है। अध्यक्ष ज़ाकिर नायक इसे edutainment चैनल भी कहते हैं। डॉ ज़ाकिर नाईक ने इस्लाम के प्रचार के मकसद से 1991 में इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन की स्थापना की थी। जानकर ये भी बताते हैं कि जाकिर नाइक को बाइबल, कुरान, गीता की बहुत अच्छी जानकारी है, इन्हें ये तक पता है कि कौन से पेज पर क्या लिखा हुआ है और यही वजह है कि ज़ाकिर नाईक की हर बात दुनियाभर में 100 करोड़ लोगों तक पहुंचती है, जिसके बाद लोग बड़ी आसानी से उनपर विश्वास भी कर लेते हैं।

सूत्रों के मुताबिक कई ऐसी संस्थाएं और ग्रुप है, जो बढ़ावा देने के लिए बड़ी मात्रा में पीस टीवी के जरिये फंडिंग कर रहे है। इसी के जरिये एक ऐसा खेल चल रहा है, जिसका बंद होना बहुत जरुरी है। कई लोग तो ज़ाकिर नाईक पर पूरी तरह बैन लगा देने की वकालत करते हैं। ज़ाकिर नाइक के बारे में कहा जाता है कि वो अपनी हर बात उदाहरण के साथ सबके सामने रखते हैं और शायद यही वजह है दुनियाभर में करोड़ों लोग उन्हें फॉलो करते हैं। लेकिन कई बार वो ऐसे नफरत भरे बयान भी दे देते हैं, जिसके चलते मुंबई पुलिस ने बॉम्बे पुलिस एक्ट के तहत कार्रवाई भी की है।