सिर्फ 78 मिनट में पूरा होगा दिल्ली से चंडीगढ़ का सफर!

नई दिल्ली ( 16 जनवरी ): अगर भारतीय रेलवे फ्रेंच रेलवे की 12 हजार करोड़ रुपये खर्च के ऑप्शन को मान लिया तो दिल्ली-चंडीगढ़ का सफर केवल 78 मिनट में पूरा हो सकेगा। इस ऑप्शन को चुनने की स्थिति में न सिर्फ रेलवे लाइन में सुधार किया जाएगा, बल्कि पावर सप्लाइ और सिग्नल सिस्टम को इस तरह से तैयार किया जाएगा कि इस रूट पर ट्रेन 220 किमी की रफ्तार से दौड़ने लायक हो जाएं।

इस तरह दिन भर में इस रूट पर 18 जोड़ी ट्रेनें चलाई जा सकेंगी। लेकिन अगर रेलवे महज सात हजार करोड़ रुपये खर्च करने का ऑप्शन चुनती है तो यह सफर 87 मिनट में और अगर साढ़े चार हजार करोड़ रुपये खर्च करना चाहती है तो इस सफर में और ज्यादा वक्त लगेगा। इस रिपोर्ट की स्टडी करके रेलवे तय करेगी कि कौन सा ऑप्शन उसके लिए सबसे ज्यादा सही होगा।

खबरों के मुताबिक इस रूट पर तेज रफ्तार ट्रेनें चलाने के इरादे से रेलवे ने फ्रेंच रेलवे- एसएनसीएफ को स्टडी करने की जिम्मेदारी दी थी। अब उसने अपनी फाइनल सर्वे रिपोर्ट दे दी है। इस रिपोर्ट में तीन विकल्प सुझाए गए हैं। खबरों की मानें तो 220 किमी की रफ्तार से इस रूट पर ट्रेनें चलाने के लिए पूरे ट्रैक को न सिर्फ दोनों तरफ से कवर करना होगा, बल्कि सिग्नल से लेकर पावर सप्लाइ सिस्टम में भी बदलाव करना होगा। लेकिन इसका फायदा यह मिलेगा कि सवा घंटे से कुछ ही ज्यादा वक्त में ही दिल्ली-चंडीगढ़ की दूरी तय हो जाएगी।

इसी तरह से दूसरे विकल्प के तहत अगर इस रूट पर 180 किमी की रफ्तार से ट्रेनें चलानी हों, तो उसके लिए सात हजार करोड़ रुपये खर्च करने होंगे। लेकिन तब इस रूट पर महज 15 जोड़ी ट्रेनें ही हर दिन चलायी जा सकेंगी और सफर भी 87 मिनट में पूरा होगा। इसके अलावा तीसरा विकल्प 160 किमी की स्पीड पर ट्रेनें चलाने का होगा, उसके लिए रेलवे को चार हजार छह सौ करोड़ रुपये का निवेश करना होगा। वर्तमान में इस रूट पर शताब्दी एक्सप्रेस 110 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से दौड़ती है। केवल दिल्ली-आगरा रूट ही ऐसा है जिसमें वर्तमान में 150 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से ट्रेन को दौड़ाया जा सकता है।

साल 2015 में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फ्रांस गए थे तो उस समय भारतीय रेल और फ्रेंच रेलवे के बीच एक एमओयू हुआ था। इसमें तय हुआ था कि फ्रांस भारत के कई रूट पर ट्रैक की स्टडी करके बताएगा कि किस तरह से यहां कम-से-कम 200 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से ट्रेनों को दौड़ाया जा सकता है। इसके अलावा रेलवे के मॉडर्नाइजेशन में दूसरे तरीकों से भी फ्रांस मदद करेगा।