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नशे के आगोश में समाता बिहार का युवा, पटना समेत पूरे राज्य में फैला नशे का कारोबार

बिहार सरकार ने भले ही शराब के कारोबारियों के अरमानों पर बुलडोजर चला दिया हो, लेकिन राज्य में नशे के सौदागरों की जड़े और मजबूत हो गई हैं। हकीकत ये है कि बिहार अब उड़ता पंजाब की तरह उड़ता बिहार बन चूका है

अमिताभ ओझा, न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली(18 नवंबर): बिहार सरकार ने भले ही शराब के कारोबारियों के अरमानों पर बुलडोजर चला दिया हो, लेकिन राज्य में नशे के सौदागरों की जड़े और मजबूत हो गई हैं।  हकीकत ये है कि बिहार अब उड़ता पंजाब की तरह उड़ता बिहार  बन चूका है, जहां राजधानी पटना से लेकर हर शहर और कस्बों तक में नशे के सौदागरों का जाल बिछ गया है। चाहें पडोसी देश नेपाल के ड्रग माफिया हो या मुंबई से लेकर कोलकता तक सभी का नेटवर्क बिहार में फ़ैल चूका है। सरकारी रिपोर्ट की ही माने तो शराबबंदी के बाद बिहार में मादक पदार्थो की बरामदगी का आंकड़ा एक हजार गुना बढ़ गया है। ब्राउन शुगर, अफीम, गांजा, चरस और हेरोइन से लेकर नशे की दवाइयों का सेवन इस कदर बढ़ा है की शराबियों की संख्या भी पीछे छुट गई है। बिहार में में बच्चे और नौजवान बहुत तेजी से मादक पदार्थों के सेवन के आदी हो रहे हैं। मादक पदार्थों की लगातार बड़े पैमाने पर हो रही बरामदगी इस बात का सबूत है कि शराबबंदी के बाद गांजा,अफीम ,हेरोईन और चरस की माग और भी तेज हो गई है। सरकार का ही ग्राफ बता रहा है कैसे ट्रेन और हवाई जहाज से अब मादक पदार्थ बिहार पहुंच रहा है। 

पटना में नशा उन्मूलन से जुडी राखी शर्मा से चौंकाने वाली जानकारी दी उन्होंने कहा कि शहर में नशा उन्मूलन केंद्र चलाती है, जिनके केंद्र में बड़े से लेकर बच्चे तक है, लेकिन हैरानी वाली बात यह है की पहले जहां शराबी जिनकी उम्र बीस वर्ष से ज्यादा होती थी वही आते थे, लेकिन अब 13-14 साल के बच्चे आ रहे हैं। किसी को नशे वाली ड्रग्स की आदत है तो किसी को ब्राउन शुगर की .पटना में सबसे ज्यादा ब्राउन शुगर के लत वाले नाबालिग आ रहे है . राखी शर्मा के अनुसार स्थिति काफी चिंताजनक है .शराबबंदी के बाद विकल्प के तौर पर लोग ड्रग्स का इस्तेमाल करने लगे है। नशे की दवैया और इंजेक्शन लिया जा रहा है, जब शराब बंदी हुआ था तो इस बात का अंदेशा था की विकल्प के तौर पर कुछ न कुछ नशा करेंगे, लेकिन तस्वीर इतनी भयानक होगी इसकी अंदाजा नहीं था।

झोलाछाप डॉक्टर भी फर्जी नशा मुक्ति केंद्र चलाकर लोगों से पैसे वसूल रहे हैं। पटना में पुलिस पुलिस ने तफ्तीश की तो पाटलिपुत्र इलाके से  एक झोला छाप डाक्टर को पकड़ा गया। शैलेन्द्र कुमार नामक फर्जी डाक्टर बीएमएस होने का बोर्ड लगा रखा था, लेकिन जब कारवाई हुई तो पता चला की उसके पास कोई डिग्री नहीं था वह पहले एक नशा उन्मूलन केंद्र में काम करता था और वही से नशे वाली दवाइयों की जानकारी के बाद फर्जी क्लिनिक खोल कर चला रहा था। दरअसल क्लिनिक की आड़ में वह छात्रो और युवाओ को नशे का इंजेक्शन से लेकर दवैया मुहैया करवाता था। उसके पास से काफी संख्या में बुप्रनौर्फिन इंजेक्शन, एमरोक्स एल इंजेक्शन ,ऐना फोर्तेन्न इंजेक्शन के साथ कोडिन वाली कफ सिरप बरामद किया गया।

पटना में मेडिकल की दुकान करने वाले एक दुकानदार से जब इन दवाइयों के बारे में पूछा तो तो कई चौंकाने वाली जानकारियां मिली। दुकानदार ने बताया की जायदातर युवा और टिनएजर दर्द निरोधक दवाइयां या फिर एविल का इस्तेमाल करते हैं। जैसे की नींद की दवाईं, पेट दर्द में दी जाने वाली ऐना फोर्टीन,  DAYLON के अलावा आयोडेक्स का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन इन नशेड़ियो को पकड़ना असं इसलिए होता है की ये दवाइयां की मात्रा ज्यादा डिमांड करते है . इसलिए बिना डाक्टर की पर्ची के इन्हें दवाइया नहीं दी जाती है। वहीं कुछ दिन पहले ब्राउन शुगर का नेटवर्क चलने वाली सरगना भाभी जी को पटना पुलिस ने गिरफ्तार किया था। उसके पास से डेढ़ करोड़ का ब्राउन शुगर भी बरामद किया गया था। जांच में सामने आया था की कैसे भाभी जी पटना में इतना बड़ा गिरोह चला रही थी, उसका नेटवर्क नेपाल से लेकर दिल्ली और मुंबई तक फैला था।

बिहार सरकार के आंकड़े ही कहते है की 2015 में शराब बंदी के बाद से  बिहार में ड्रग्स की जब्ती में 1000 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के पटना जोन के मुताबिक ओपियम और हशीश जैसे ड्रग्स के जब्ती मामले में बिहार देश में अव्वल है। गांजा जब्ती में आंध्र प्रदेश के बाद बिहार दूसरे नंबर पर है, सबसे खास बात यह है कि साल 2015 में गांजा 14.4 किग्रा जब्त हुआ। 2016 में यह 10,800 किग्रा तक पहुंच गया और 2017 में 28,888 किग्रा जप्त हुआ, जबकि 2018 में 40,670 ग्राम .ये बड़े पैमाने पर हो रही बरामदगी ये बताने के लिए काफी है कि कितने बड़े पैमाने पर नशा का कारोबार हो रहा है। मतलब साफ है की शराब के विकल्प के रूप में लोग इन मादक पदार्थों का इस्तेमाल कर रहे हैं। 2015 में बिहार में हशीश जैसे मादक पदार्थ की कोई जब्ती नहीं हुई थी, लेकिन  2017 में यह 244 किग्रा बरामद हुआ। ओपियम 2015 में 1.7 किग्रा जब्त हुआ, जबकि 2016 में 14 किग्रा और 2017 में ये आंकड़ा 329 किग्रा 2018 में  450 किग्राम और  2019 अगस्त तक  323 किग्रा तक  पहुंच गया यानी इसकी खपत अचानक कई गुना बढ़ गई है। 

पटना के अलावा सीमांचल के इलाको में मादक पदार्थो की बरामदगी के कई बड़े मामले सामने आये है। मादक पदार्थों की तस्करी हाल के वर्षों में बढ़ने का अंदाजा इससे भी लगाया जा सकता है कि वर्ष 2016 से लेकर अब तक काफी मात्रा में मादक पदार्थ बरामद किए जा चुके हैं। जांच के दौरान फरवरी 2018 में बेतिया पुलिस ने 70 लाख रुपये कीमत की चरस के साथ तस्करों को पकड़ा था। फरवरी 2018 में सुगौली से एसएसबी ने पांच करोड़ मूल्य का चरस बरामद किया था। इससे पहले जुलाई 2017 में एसएसबी ने पश्चिमी चंपारण जिले के शिकारपुर क्षेत्र से 58 किलो चरस बरामद किया था। सितंबर 2017 में चंपारण जिले के इनरवा क्षेत्र से करीब 20 करोड़ मूल्य का मादक पदार्थ बरामद हुआ था। मार्च 2017 में रक्सौल से सवा करोड़ मूल्य का हेरोइन बरामद हुआ था। वर्ष 2016 में सत्याग्रह एक्सप्रेस से वाल्मीकि नगर रोड स्टेशन पर एक महिला से 40 लाख रुपये का चरस एसएसबी ने बरामद किया था। दिसंबर 2016 में रामनगर पुलिस ने 20 लाख रुपये का नशीला पदार्थ बरामद किया था।संबंधित स्टेशन पर गिरोह के एजेंट द्वारा मादक पदार्थ को उतार सड़क के रास्ते गंतव्य तक पहुंचाया जाता है। पूर्वोत्तर की ओर से आने वाली माल लदे ट्रकों से गांजा, एवं हेरोइन को चमड़े के छोटे बैग में पैक कर देश के बड़े शहरों में भेजा जाता है।

 All Image source Google

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