"किसने कहा था तुम्हें काम के लिए सऊदी अरब आओ?"

 

कराची (9 अगस्त) :  मक्का से 30 किलोमीटर दूर सामीशी कैंप में चार महीने बिताने के बाद 26 वर्षीय मोहम्मद तनवीर जेद्दाह से कराची लौटा है। तनवीर ने डॉन अखबार को फोन पर कैंप में बिताए हुए दिनों के बारे में बताया।

कराची में लियाकताबाद नंबर 10 के रहने वाले तनवीर के मुताबिक कैंप में उसकेसाथ करीब 400 और पाकिस्तानी थे। कई बार ऐसा वक्त भी आया कि वहां खाना और पानी कुछ भी उपलब्ध नहीं था।  

तनवीर ने बताया कि वो हर महीने 800 सऊदी रियाल कमा रहा था, इसमें वो अपना खर्च निकालने के साथ घर पर भी कुछ पैसा भेज देता था। तनवीर पिछले दो साल से वहां काम कर रहा था। लेकिन छह महीने पहले उसे पता चला कि उसकी कंपनी सऊदी ओगेर लिमिटेड जेद्दाह में अपना कंस्ट्रक्शन का काम अस्थायी तौर पर रोक रही है। तनवीर के मुताबिक पहले तो लगा कि कुछ दिन का संकट है। लेकिन फिर हफ्ते, महीने बीतते गए और सैलरी मिलनी बंद हो गई। हमें हर दिन कैंप में ही रिपोर्ट करने को कहा गया। वहां छोटे छोटे कमरों में कई कई लोगों को रहना पड़ा।  

तनवीर ने बताया कि एक महीना पहले वो कुछ दोस्तों के साथ जेद्दाह में पाकिस्तानी दूतावास में गया था। वहां हमने अपने मुश्किल हालात के बारे में बताया तो एक अफसर ने कहा- किसने कहा था तुम्हें सऊदी अरब में काम करने आओ? तनवीर के मुताबिक इसके बाद वो दूतावास में नहीं गए।

मिस्त्री का काम करने वाले तनवीर ने कहा कि इसके बाद उन्होंने डरते डरते सऊदी अरब के अधिकारियों के पास जाने का फैसला किया। वहां जाने में हमेशा खतरा रहता है। लेकिन सऊदी अधिकारियों ने हमें कुछ दिन खाना मुहैया कराया। लेकिन थोड़े दिन बाद वो भी बंद हो गया।

तनवीर ने कहा कि आखिर उन्होंने अपना बोनस और छह महीने की सैलरी छोड़ कर पाकिस्तान वापस आना ही बेहतर समझा।

तनवीर की तरह ही मोहम्मद अजहर हुसैन शाह की कहानी है। वो बीते तीन साल से बिन लादेन ग्रुप ऑफ कंपनी में काम कर रहे थे। इनके जैसे 12,000 पाकिस्तानी मजदूहर रियाद, जेद्दाह, दम्मन, ताएफ में फंसे हुए हैं। ये खुद को घर का ना घाट का वाली स्थिति में पा रहे हैं।