मां ने कहा- पिता के देहांत के दिन भी विराट ने खेला था मैच

नई दिल्ली (28 मार्च): दिल्ली का एक लड़का, जिसका नाम आज पूरी दुनिया में गूंज रहा है। लोग वाहवाही कर रहे हैं, नाम जप रहे हैं, भगवान से मन्नत मांग रहे हैं कि उन्हें भी ऐसा खिलाड़ी दे। कोई उसे दूसरा सचिन तेंदुलकर कह रहा है, कोई सर डॉन ब्रैडमैन। हम बात कर रहे हैं विराट कोहली के बारे में, जिन्होंने कल ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 82 रनों की पारी खेल कर टीम इंडिया को सेमीफाइनल में पहुंचा दिया।   आज अगर हिंदुस्तान में कोई क्रिकेट के भगवान सचिन रमेश तेंदुलकर की विरासत को आगे बढ़ाने का असली हकदार है तो वो है विराट कोहली। ये खिलाड़ी यूं ही महान नहीं बना। कोहली के विराट बनने की जमीन बचपन से तैयार हो रही थी। विराट की मां को याद है वो लम्हा जब पिता के देहांत के दिन भी विराट मैच खेलने चले गए थे। 

पिता के देहांत के दिन विराट ने खेला था मैच  18 दिसंबर 2006 की बात है, रणजी मैच में कर्नाटक के खिलाफ विराट कोहली ने दिल्ली की तरफ से डेब्यू किया। यह मैच फिरोजशाह कोटला मैदान पर खेला जा रहा था। कोहली बैटिंग कर रहे थे। कोहली का यह रणजी क्रिकेट में डेब्यू मैच था।

कर्नाटक ने पहली पारी में 446 रन बनाए थे। जवाब में दिल्ली की पांच विकेट जल्द ही गिर गए। इसके बाद 18 साल के विराट ने बल्ला पकड़ा और पूनीत बिस्ट के साथ मिलकर टीम को 103 रन के स्कोर तक ले गए। दूसरे दिन के खेल खत्म होने तक कोहली 40 रन बनाकर नॉट आउट पवेलियन लौटे थे। लेकिन इसके बाद कोहली के लाइफ में एक ऐसी ट्रेजडी घटी जिससे कोहली की पूरी जिंदगी बदलकर रख दी।

अचानक उसी रात कोहली को फोन आया कि उनके पिता का ब्रेन हैमरेज के चलते देहांत हो गया है। इधर, दिल्ली को मैच में वापस आने के लिए कोहली का अगले दिन बल्लेबाजी करना बेहद ही जरूरी था। हालांकि टीम के खिलाड़ियों ने उन्हें घर जाने के लिए कहा लेकिन कोहली ने अपना फर्ज टीम के लिए पहले समझा और दिल्ली के लिए 90 रन की बेमिशाल पारी खेली। उस मैच में कोहली ने जिस परिस्थिती में बल्लेबाजी करी थी वो असमान्य था।

अपनी 90 रनों की पारी में कोहली ने पिच पर 281 मिनट और 238 गेंद का सामना किया था। कोहली के इस बेमिशाल पारी के कारण दिल्ली की टीम मैच बचानें में सफल रही थी। 90 रन की बेहतरीन पारी खेलने के बाद कोहली तुरंत अपने पिता की अंत्येष्टि में चले गए।

कोहली ने यह पारी उस वक्त खेली जब उन्हें पूरी तरह से मालूम था कि उनके पिता अब इस दुनिया में नहीं हैं ये सबके बावजूद जिस तरह से कोहली ने अपने भावनाओ पर काबू पाकर बल्लेबाजी करी थी वो किसी शब्द में बयान नहीं किया जा सकता है।

आज विराट कोहली का रुतबा भारतीय क्रिकेट में कईं गुना ज्यादा बढ़ गया है। पाक को वर्ल्ड कप में लगातार ग्यारहवीं हार का स्वाद चखाने में विराट का सबसे बड़ा योगदान रहा। पाकिस्तान के खिलाड़ी भी मानते हैं उन्होंने अपने करियर में इतना शानदार बल्लेबाज़ नहीं देखा।

मैंने कई साल क्रिकेट खेला है.. बड़े से बड़े दिग्गजों को देखा है लेकिन पिछले 20 सालों में मैंने विराट कोहली जैसा बल्लेबाज़ नहीं देखा। -शोएब अख्तर, पूर्व क्रिकेटर, पाकिस्तान