हादसे में खोया हाथ, अब मिलेगी ऐसी 'बाजू' जिसमें होंगे मोबाइल चार्जर, लेज़र लाइट, टॉर्च

नई दिल्ली (17 मई): चार साल पहले जेम्स यंग नाम के इस शख्स की जिंदगी हमेशा के लिए बदल गई। जब एक भयानक हादसे में वह एक ट्रेन के नीचे गिर गया। हादसे में उसने अपना बायां हाथ खो दिया। उस वक्त जेम्स की उम्र 22 साल थी और वह एक बॉयोलॉजिकल साइंटिस्ट के तौर पर काम करता था। एक साल पहले जेम्स की जिंदगी में एक बार फिर से एक मोड़ आया है। उन्हें एक असाधारण एक्सपेरीमेंट 'पार्ट साइबॉर्ग' के लिए चुना गया है। इस प्रयोग में उन्हें एक प्रोटोटाइप बायोनिक आर्म लगाया जाएगा।

मेल ऑनलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, हादसे के वक्त जेम्स डॉकलैंड्स लाइट रेलवे ट्रेन में चढ़ने की कोशिश कर रहे थे। उस दौरान वह उत्तरी लंदन में अपने दोस्तों के साथ नाइट आउट पर थे। हादसे में जेम्स को कई बड़ी चोटें आईं। फेफड़ों, खोपड़ी और चेहरे पर तो चोटें आईं ही थीं। लेकिन इसके अलावा पसली और रीढ़ की हड्डी में भी फ्रैक्चर हुआ।  बांए पैर में भी घुटने के नीचे काफी चोट आई थीं। 

हादसे के बाद करीब साढ़े तीन महीने अस्पताल में गुजारने के बाद उसे घर जाने के लिए डिस्चार्ज कर दिया गया। उसे एक स्टैंडर्ड ईशू एनएचएस प्रोस्थेटिक लेग और आर्म (नकली टांग और पैर) लगाई गई थी।

जेम्स को ये सारी व्यवस्था 'बदसूरत, अजीब से रंगों वाली और साधारण' सी लगी। नकली हाथ से वह सीमित काम ही कर सकता था। ऐसी परेशानियों के बीच जेम्स काफी दुखी हो गए। जेम्स एक बेहतर लाइफ चाहते थे। इस वजह से वह अपने फुलटाइम जॉब पर भी नहीं लौट सकते थे। अपने दर्द को दूर करने के लिए उन्हें हैवी-पेन किलर लेनी पड़ती थीं। कुल मिलाकर उनका जीवन अंधेरे में चला गया था। लेकिन जेम्स ने हिम्मत नहीं हारी और वह अपने आपको स्वस्थ और ह्रष्ट-पुष्ट बनाने के लिए लगातार काम करते रहे। 

एक साल पहले जेम्स का जिंदगी में एक बार फिर से एक मोड़ आया। उन्हें एक असाधारण एक्सपेरीमेंट 'पार्ट साइबॉर्ग' के लिए चुना गया। इस प्रयोग में उन्हें एक प्रोटोटाइप बायोनिक आर्म लगाया जाएगा।

ये एक एडवांस्ड हाथ होगा डो उनके खोए हुए हाथ की जगह लगेगा। इस आर्म की खासियत जानकर आपकर आपको हैरानी हो सकती है। दरअसल, इसे ग्राउंड-ब्रेकिंग रोबोटिक्स टेक्नॉलॉजी के जरिए विकसित किया गया है। जिसे उनकी नाड़ियों और मांसपेशियों के साथ कंथे से जोड़ा जाएगा। ये इस तरह से डिजाइन की गई है जो लगाने वाले शख्स की पर्सनैलिटी के हिसाब से मैच करती है। यह रोबोटिक आर्म कंथे की त्वचा से सेंसर्स को डिटेक्ट करती है। इन्हीं सेंसर्स के जरिए आर्म और हाथ संचालित होता है। ये पूरा सिस्टम बैटरी से संचालित है।

हैरानी की बात है कि जेम्स का नया हाथ असली हाथ से भी ज्यादा महसूस कर सकता है, मूवमेंट कर सकता है। इसके अलावा छोटी से छोटी चीजों को भी पकड़ सकता है। जैसे सिक्के। इस आर्म में लेज़र लाइट, टॉर्च, यूएसबी पोर्ट भी लगाया गया है। जिससे फोन भी चार्ज किया जा सकता है। इसके अलावा एक घड़ी और ड्रोन को भी इसमें फिट किया गया है। 

इस अनोखी बॉयोनिक आर्म को लंदन स्टूडियो ऑफ प्रोस्थेटिक्स आर्टिस्ट सोफी डी ओलिवीरिया बराटा ने फिट किया है। जो अल्टरनेटिव लिम्ब प्रोजेक्ट की क्रिएटर हैं।