अमेरिकी कंपनियां भी भारत में प्रॉफिट कमा रहीं: निर्मला सीतारमण

नई दिल्ली ( 21 अप्रैल ): केंद्रीय वाणिज्य मंत्री निर्मला सीतारमण ने अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया जैसे कुछ देशों द्वारा अपनी वीजा व्यवस्था को सख्त करने पर चिंता जताई। गुरुवार को उन्होंने कहा कि पूरी बहस का विस्तार कर इसमें उन अमेरिकी कंपनियों को भी शामिल करना होगा जो भारत में प्रॉफिट कमा रही हैं।


मंत्री ने कहा 'हमें समझना होगा कि केवल अमेरिका में भारतीय कंपनिया नहीं हैं, भारत में भी कई बड़ी अमेरिकी कंपनियां हैं। वे भी यहां हैं, वो भी प्रॉफिट कमा रही हैं, जो अमेरिकी अर्थव्यवस्था में जाता है।'


उन्होंने कहा, 'इसलिए इस परिस्थिति में केवल एकपक्षीय तरीके से भारतीय कंपनियों को अमेरिकी सरकार के आदेश का सामना नहीं करना, भारत में कई अमेरिकी कंपनियां भी हैं जो कई साल से काम कर रही हैं और इसलिए मैं चाहती हूं कि पूरी बहस का विस्तार हो। और इसमें इन सभी पहलुओं को शामिल किया जाए और हम सुनिश्चित करेंगे कि इन सभी कारकों को दिमाग में रखा जाए।'


निर्मला ने अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड जैसे देशों का उदाहरण दिया जो कुशल पेशेवरों की आवाजाही के लिए अपनी वीजा व्यवस्था को कड़ा कर रहे हैं। सीतारमण ने कहा, 'अब विभिन्न देश सेवाओं के व्यापार के मामले में स्पष्ट तौर पर संरक्षणवाद की दीवार खड़ी कर रहे हैं।'


उन्होंने कहा कि यह समय है जबकि सेवाओं के व्यापार के लिए हमारे पास वैश्विक ढांचा होना चाहिए। हम सक्रिय तौर पर अपना प्रस्ताव डब्ल्यूटीओ में आगे बढ़ाएंगे। भारत डब्ल्यूटीओ में इस करार को लेकर दबाव बना रहा है।


सीतारमण ने कहा कि भारत चाहता है कि सभी सदस्य देश दिसंबर में अर्जेंटीना में डब्ल्यूटीओ की मंत्री स्तरीय बैठक से पहले इस प्रस्ताव का अध्ययन करें। H-1B वीजा पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप द्वारा दस्तखत किए जाने के बारे में सीतारमण ने कहा कि अमेरिका ने इसमें से कुछ निश्चित संख्या में वीजा भारत को देने की प्रतिबद्धता जताई है। 'हम निश्चित तौर पर चाहेंगे कि अमेरिका अपनी इस प्रतिबद्धता को पूरा करे।'