आतंकवाद का रास्ता छोड़ सैनिक बने शहीद नज़ीर अहमद वानी को मिलेगा अशोक चक्र

न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (24 जनवरी):  जम्मू-कश्मीर के शोपियां में पिछले साल छह आतंकियों को मार गिराने वाले शहीद लांस नायक नजीर वानी को देश के सबसे बड़े वीरता पुरस्कार अशोक चक्र के लिये चुना गया है। सेना में शामिल होने से पहले वानी खुद आतंकी गतिविधियों में शामिल रहते थे। लांस नायक नजीर वानी सेना की 34 राष्ट्रीय राइफल्स में तैनात थे। पिछले साल शोपियां में सेना के ऑपरेशन में उन्होंने 6 आतंकियों को मार गिराया था। इसी ऑपरेशन में वह शहीद भी हो गए थे. आतंकियों के खिलाफ उनकी बहादुरी को देखते हुए उन्हें दो बार सेना मेडल भी मिल चुका है। 

कश्मीर घाटी के कुलगाम जिले के चेकी अश्मुजी गांव के रहने वाले नजीर के परिवार में उनकी पत्नी और दो बच्चे हैं। भारत सरकार सैनिकों को उनकी वीरता के लिए शौर्य चक्र, कीर्ति चक्र और अशोक चक्र से सम्मानित करती है। इनमें अशोक चक्र सबसे बड़ा सम्मान है।  इस साल कीर्ति चक्र के लिए चार जवानों और शौर्य चक्र के लिए 12 जवानों का चयन किया गया है।  जम्मू-कश्मीर की कुलगाम तहसील के अश्मूजी गांव के रहने वाले नज़ीर एक समय खुद आतंकवादी थे। वानी जैसों के लिए कश्मीर में 'इख्वान' शब्द इस्तेमाल किया जाता है। बंदूक थामकर वह जाने किस-किससे किस-किस चीज़ का बदला लेने निकले थे। पर कुछ वक्त बाद ही उन्हें गलती का अहसास हो गया और वह आतंकवाद छोड़कर सेना में भर्ती हो गए। 

बीते साल 23 नवंबर 2018 को जब वानी 34 राष्ट्रीय रायफल्स के साथियों के साथ ड्यूटी पर थे, तब इंटेलिजेंस से शोपियां के बटागुंड गांव में हिज्बुल और लश्कर के 6 आतंकी होने की खबर मिली। इनपुट थे कि आतंकियों के पास भारी तादाद में हथियार हैं। वानी और उनकी टीम को आतंकियों के भागने का रास्ता रोकने की ज़िम्मेदारी सौंपी गई। राष्ट्रपति के सेक्रटरी की ओर से जारी प्रेस रिलीज़ बताती है, 'लांस नायक वानी ने दो आतंकियों को मारने और अपने घायल साथी को बचाते हुए सबसे बड़ा बलिदान दिया। खतरा देखते हुए आतंकियों ने तेज गोलीबारी शुरू कर दी और ग्रेनेड भी फेंकने लगे। ऐसे अकुलाहट भरे वक्त में वानी ने एक आतंकी को करीब से गोली मारकर खत्म कर दिया।' 

23 नवंबर 2018 के इस एनकाउंटर में वानी और उनके साथियों ने कुल 6 आतंकियों को मार गिराया था। इनमें से दो को वानी ने खुद मारा था। एनकाउंटर में वह बुरी तरह ज़ख्मी हो गए थे और हॉस्पिटल में इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया था। 26 नवंबर को अंतिम संस्कार से पहले वानी को उनके गांव में 21 तोपों की सलामी दी गई थी। वह अपने पीछे पत्नी और दो बच्चे छोड़ गए। वानी को मरणोपरांत अशोक चक्र से नवाज़ा जा रहा है, जो भारत का शांति के समय में दिया जाने वाला सर्वोच्च वीरता पुरस्कार है।