भारत के हाथ लगे कश्मीर में आतंकियों के टेरर मेल

अमित कुमार, नई दिल्ली (21 जुलाई): कश्मीर में पिछले दिनों आतंकवादी बुरहान की मौत के बाद जो भी हिंसा हुई उसमें में पाकिस्तान का हाथ था। सिर्फ हाथ ही नहीं था उसकी सारी फंडिंग, उसका सारा प्लान पाकिस्तान ने रचा। घाटी को अशांत करने के लिए आतंकवादियों को हर तरह की मदद करने के लिए पाकिस्तान आगे रहता है। ये खुलासा किया है अमेरिका की खुफिया एजेंसियों ने जिन्होंने आतंकवादियों के कई ई-मेल इंटरसेपट किए, जिसमें आतंकवादी पाकिस्तान में बैठे अपने आकाओं से बात करते हैं।

कश्मीर का माहौल खराब करने में सिर्फ पाकिस्तान का हाथ है। आतंकवादी बुरहान के बाद घाटी में जो भी हिंसा हुई वो पाकिस्तान प्रायोजित थी। गृहमंत्री ने लोकसभा में इस बात की जानकारी दी।

अब खबर है कि कश्मीर में पाकिस्तान ने आतंकवादियों का एक बड़ा नेटवर्क तैयार किया हुआ है, जो पाकिस्तान के ईशारे पर सेना पर हमला करते हैं। सेना के बंकरों की लोकेशन पाकिस्तान तक पहुंचाते हैं और मौका मिलने पर घाटी में हिंसा भी करवाते हैं। ये खुलासा अमेरिका की खुफिया एजेंसियों ने किया है। अमेरिकी एजेंसियों ने कश्मीर से ऐसे कुछ मेल इंटरसेप्ट किए हैं, जिनसे पाकिस्तान का असली चेहरा बेनकाब हो गया है। ये मेल अमेरिका ने भारत को मुहैया करवाए हैं। ऐसे चार मेल है जो अमेरिका ने पकड़े हैं।

पहले मेल में घाटी में बैठा हिजबुल कमांडर पाकिस्तान में बैठे अपने आका को घाटी की जमीनी हकीकत बता रहा है।

आतंकवादी का पहला ई-मेल:    "भाईजान यहां कश्मीर में हालात दिन पर दिन खराब होते जा रहे हैं। हमारे मुजाहिद हर रोज मर रहे हैं भारतीय सेना की सीमा पर चौकसी बढ़ा देने से हमें जरुरी मदद मिल नहीं पा रही है। भाईजान आपको ये भी बता दूं कि हमारे सीनियर कमांडर बेसकैंप से बाहर निकलने को तैयार नहीं हो रहे हैं। यहां तक की वो फील्ड में लड़ने के लिए भी नहीं निकलते हैं, ऐसे में उनकी जगह कम अनुभवी कमांडर भारतीय सेना के खिलाफ ऑपरेशन चला रहे हैं। हमें लोकल लोगों का साथ भी अब उतना नहीं मिल पा रहा है। ज्यादातर लोकल जिनके घर के मेंबर मुजाहिद बने थे वो सरेंडर कर रहे हैं।''

आतंकवादी पल-पल की जानकारी पाकिस्तान में बैठे अपने आकाओं को ई-मेल के जरिए ही दे रहे हैं। घाटी में सीआरपीएफ के जवानों पर आतंकी हमले की जानकारी भी ईमेल से ही दी गई।

आतंकवादी का दूसरा ई-मेल: ''दो दिन पहले हमारे साथियों ने एक सीआरपीएफ जवान को पिस्टल फायर से नजदीक से हलाक किया है। हम जान बूझकर हिकमत के तहत कारवाई कबूल नहीं की, ये फैजान ग्रुप ने नहीं बल्कि दूसरे ग्रुप की कारवाई थी।''

इंटरसेप्ट हुए ई-मेल से ये पता लगा है कि घाटी के आतंकवादी ईमेल के जरिए हिजबुल मुजाहिदीन के चीफ सैयद सलाऊद्दीन से भी बात करते हैं।

आतंकवादी की तीसरा ई-मेल: ''जनाब सैय्यद सउलाऊद्दीन, जैसा की आप ने 1990 से जो कश्मीर में लड़ाई छेड़ी है उसके तहत हजारों लोगों ने पीओके के ट्रेनिंग कैंप में हिस्सा लिया। उनमें से ज्यादतर मारे भी गये और कुछ अपाहिज हो गये। हम आपके और पाकिस्तान सरकार के बहुत शुक्रगुजार है कि आप पैसे भेज कर लगातार मदद कर रहे हैं।''

चौथे ईमेल में आतंकवादी पाकिस्तान में बैठे अपने आकाओं से शिकायत करते दिखे।

आतंकवादी का चौथा ई-मेल: ''भाईजान आपने जो थौर्य्या का सेटेलाइट फोन दिया है वो हमारी जान के दुश्मन बनते जा रहे हैं। ये मौत का सामान बनता जा रहा है। मैं एक दिन इस सैटेलाइट फोन से आपसे बात करने की कोशिश कर रहा था। सिग्नल वीक होने से मैं एक छोटी सी पहाड़ी पर चढ़ गया, लेकिन जैसे ही सिग्नल मिला भारतीय सेना का हेलीकाप्टर वहां उड़ता हुआ दिखने लगा। फिर जल्दी से मैंने फोन बंद कर दिया। यही बात मेरे दूसरे साथी ईस्माल ने भी मुझे बताई थी। फोन पर बात करते ही सेना का हेलीकॉप्टर आ जाता है। गांव में सेना की टुकड़ी भी पूछताछ के लिए आ गई। भाईजान हमारे सभी साथी थौर्रया सेटेलाइट से बात करने में डर रहे हैं।''‎

इन ई-मेल से साफ है कि कश्मीर की फिजाओं में दहशतगर्दी का बीज बोने के पीछे पाकिस्तान का दोगुला चेहरा है।