आतंकवादी पाकिस्तान को कश्मीर नहीं दिला सकते- 'द नेशन'

नई दिल्ली (11 अक्टूबर): पाकिस्तानी अखबार 'डॉन'के बाद 'द नेशन' ने भी अपनी सरकार की बखिया उधेडी़ है। 'द नेशन'में बहादर अली ख़ान का एक लंबा चौड़ा लेख छपा है जिसमें कहा गया है कि आतंकी कभी पाकिस्तान को कश्मीर नहीं दिला सकते। टेररिज्म का कोई फायदा नहीं होता। भारत डिप्लोमैटिक वर्ल्ड में यह मैसेज भेजने में कामयाब रहा है कि पाकिस्तान नॉन स्टेट एक्टर्स पर एक्शन नहीं लेता। आर्टिकल के मुताबिक, ये तो सोचा भी नहीं जा सकता कि हमारी सरकार सेना को कोई फरमान सुना सकती है। लेकिन लंबे वक्त बाद ये हुआ है। नवाज ने आर्मी से कहा कि आतंकियों के खिलाफ एक्शन लिया जाए। इतना ही नहीं, ये भी कहा कि इसमें इंटेलिजेंस एजेसियां कोई अड़ंगा न लगाएं। लेख में यह सवाल भी उठाया गया है कि कहीं ये उम्मीद बहुत ज्यादा बड़ी बात तो नहीं है।

- बहादर अली ख़ान के आर्टिकल के मुताबिक, आखिर दुनिया क्यों पाकिस्तान के बारे में गलत सोचती है और खुद की बेहतर इमेज पेश करने के लिए और क्या किया जाना चाहिए। 

- इसमें कहा गया है कि नॉन स्टेट एक्टर्स के खिलाफ सिलेक्टिव एक्शन क्यों होता है। जनता को भी यही दिखाया जाता है। इस सिलेक्टिव एक्शन की वजह से ही भारत को  हमें बदनाम करने का मौका मिल जाता है।  - बहादर अली ख़ान  ने लिखा है कि सार्क के कई देशों पर दबाव बनाया कि वे नवंबर में इस्लामाबाद में होने वाली सार्क समिट से अलग हो जाएं। 9 में से पांच देश हट भी गए। समिट को रद्द कर दिया गया। 

- इस डिप्लोमैटिक तख्तापलट के जिम्मेदार नॉन स्टेट एक्टर्स हैं। इनकी वजह से ही भारत पाकिस्तान को अलग-थलग करने में कामयाब रहा है।

- बहादर अली ख़ान लिखते हैं कि "फौज को सही मायनों में एक्शन लेना होगा। अगर वो आतंकी संगठनों को पूरी तरह खत्म नहीं कर सकती तो कम से कम इतना तो जरूर किया जाना चाहिए कि उनके हथियारों पर कब्जा जमा लिया जाए। इनकी सप्लाई रोक दी जाए।  - अगर ये सुधरने को तैयार हैं तो उन्हें मौका दिया जाना चाहिए, लेकिन उनकी फंडिंग और हरकतों पर नजर रखनी ही होगी। 

- दुनिया आज एक हो गई है। इसलिए ये मुश्किल है कि आप पुरानी परंपराओं और सोर्सेस के बल पर रहने की कोशिश करें। ये मुमकिन नहीं है। 

- आतंकी संगठन कई बार हेट क्राइम्स को भी अंजाम देते हैं। ये बातें दुनिया तक पहुंचती हैं। देश की तस्वीर और खराब हो जाती है।