चीन के ऐतराज का भारत पर कोई असर नहीं, बोला- ब्रिक्स को आतंकवाद पर बात करनी ही होगी

नई दिल्ली(3 सितंबर): चीन के एतराज के बावजूद नरेंद्र मोदी ब्रिक्स समिट में आतंकवाद के मुद्दे पर भारत की चिंता को दुनिया के सामने रख सकते हैं। फॉरेन मिनिस्ट्री में सेक्रेटरी (ईस्ट) प्रीति सरन ने रविवार को कहा, "इकोनॉमिक कोऑपरेशन के अलावा भी आपसी हित के कई मसले हैं, जैसे आतंकवाद का खतरा। ये भारत के लिए सबसे अहम मुद्दा है। ब्रिक्स लीडर्स इस पर बात करने के लिए बाध्य हैं।" 

- बता दें कि 9वीं ब्रिक्स समिट 3 से 5 सितंबर तक चीन के शियामेन में होगी।  

- प्रीति सरन ने कहा, "दुनिया में कुछ बदलाव आए हैं, जिन पर ब्रिक्स समिट में चर्चा होनी जरूरी है और मैं श्योर हूं कि ब्रिक्स लीडर्स इन पर बात करने को बाध्य हैं, इनमें आतंकवाद का खात्मा भी शामिल है, जो भारत के लिए सबसे अहम मुद्दा है।"

- "आतंकवाद का मसला पूरी इंटरनेशनल कम्युनिटी को प्रभावित कर रहा है। ब्रिक्स देश (ब्राजील-रूस-इंडिया, चीन-साउथ अफ्रीका) खुद भी इससे पीड़ित हैं। पिछली ब्रिक्स समिट अक्टूबर 2016 में गोवा में हुई थी, उसमें भारत ने आतंकवाद का मुद्दा उठाया था और मुझे भरोसा है कि इस बार भी इस पर बात होगी। भारत इस समिट को बहुत गंभीरता से ले रहा है और इसीलिए आतंकवाद पर कुछ सख्त मैसेज देना चाहता है।" बता दें कि पिछली ब्रिक्स समिट में मोदी ने पाकिस्तान को 'मदरशिप ऑफ टेररिज्म' कहा था।

- चीन के फॉरेन मिनिस्ट्री की स्पोक्सपर्सन हुआ चुनयिंग ने कहा था, "आतंकवाद पर पाकिस्तान का रवैया ब्रिक्स समिट के लिए सही मुद्दा नहीं है। हमें मालुम है कि भारत की कुछ चिंताएं हैं, लेकिन ये मुद्दा उठाने पर समिट अपने मकसद से भटक सकती है। चीन अपने करीब सहयोगी की किसी भी तरह की आलोचना को बर्दाश्त नहीं करेगा। वैसे पाक खुद भी आतंकवाद से पीड़ित है।"

- इससे पहले, इंडियन फॉरेन मिनिस्टर के स्पोक्सपर्सन रवीश कुमार ने कहा था, "यह तय करना किसी देश की जिम्मेदारी नहीं है कि दूसरे देश का एजेंडा क्या होगा। चीन ऐसा करके दूसरों के अधिकारों में हस्तक्षेप कर रहा है। हर देश अपनी बात रखने को आजाद है। कोई देश क्या बात करेगा, यह कोई दूसरा देश तय नहीं करेगा।"