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युवा अवस्था में इसलिए बढ़ रही है भूलने की बीमारी

अगर आपको भी सिरदर्द या टेंशन रहती है तो यह खबर जानना आपके लिए बेहद ही जरूरी है, क्योंकि हाल ही में हुई एक रिसर्च में खुलासा

नई दिल्ली (3 मई): अगर आपको भी सिरदर्द या टेंशन रहती है तो यह खबर जानना आपके लिए बेहद ही जरूरी है, क्योंकि हाल ही में हुई एक रिसर्च में खुलासा हुआ है कि दिमाग का वह हिस्सा जो चीजों को याद रखने का काम करता है, जिसे डॉक्टरों की भाषा में 'हिपोकैंपस' कहा जाता है, वह सिकुड़ता जा रहा है। इससे लोगों को युवा अवस्था में ही भूलने जैसी बीमारियां भी हो रही हैं।

पिछले साल आरएमएल के न्यूरॉलजी विभाग ने एक रिसर्च की थी। इसमें 67 मरीजों को शामिल किया गया था। इसका मकसद यह देखना था कि कितने प्रतिशत लोग तनाव में हैं? यह दिमाग पर क्या असर करता है‌? डेढ़ साल तक चली इस रिसर्च के नतीजे बेहद चिंताजनक रहे। रिसर्च में यह बात सामने आई है कि इन 67 मरीजों में से 30 प्रतिशत मरीज ऐसे पाए गए जिन्हें तनाव है। इस तनाव की वजह से उनके दिमाग का हिपोकैंपस सिकुड़ता जा रहा है।

रिसर्च में सभी मरीजों के दिमाग का MRI किया गया और MRI करने के बाद उनके हिपोकैंपस को मापा गया। जिन लोगों में तनाव न के बराबर था, उनका हिपोकैंपस का साइज सामान्य था और जिन्हें तनाव था, उनका हिपोकैंपस सिकुड़ चुका था। इसकी वजह से ही यंग एज में भूलने की बीमारी हो रही है।

जब हम किसी चीज के बारे में ज्यादा सोचते हैं और उस चीज को लेकर तनाव में आ जाते हैं, तो हमारे दिमाग में सिरम कोटिसोल बढ़ जाता है। सिरम कोटिसोल तनाव का हॉर्मोन होता है, जिसके बढ़ने से तनाव भी बढ़ता है। यह हॉर्मोन लोगों को आत्महत्या करने तक मजबूर कर देता है, इसलिए कोशिश करनी चाहिए कि ऐसी किसी चीज के बारे में न सोचें जिससे तनाव बढ़े।

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