इस सदियों पुराने मंदिर में मिली दलितों को एंट्री की इजाजत

चेन्नई (11 जनवरी): सदियों पुराने मंदिर अरुलमिगु थुलुकांतामन में आखिरकार आपसी सहमति के बाद दलितों को एंट्री की इजाजत दे दी गई। यह मंदिर सवर्णों और दलितों के बीच मंदिर प्रवेश को लेकर शुरू हुए झगड़े से दो महीनों से यहां पर ताला लगा हुआ था।

आखिरकार गांव के बड़े-बुजुर्गों ने ग्राम सभा की एक विशेष बैठक बुलाने का फैसला किया। इस बैठक में तय किया गया कि मंदिर के दरवाजे अब सभी के लिए खुले रहेंगे।

- हरिहरपक्कम गांव में सवर्णों की आबादी है।

- पड़ोस के गांव नम्मांडी में एक दलित बस्ती के लोगों के साथ उनका विवाद था।

- अरुलमिगु थुलुकांतामन मंदिर सदियों पुराना है। दो महीने पहले यहां ताला लग गया था।

- वन्नियर समुदाय और दलितों के बीच मंदिर में प्रवेश के मुद्दे पर शुरू हुआ विवाद काफी आगे बढ़ गया था। -

-  इस परंपरा का टूटना एक ऐतिहासिक घटनाक्रम होगा। तमिलनाडु में कई ऐसे मंदिर हैं जहां दलितों का प्रवेश प्रतिबंधित है।

- इस मंदिर में दलितों को प्रवेश की अनुमति मिलने के बाद बाकी मंदिरों के भी इस नई परंपरा को अपनाने की संभावना रही है।

- इस मंदिर में हिंदू देवी दुर्गा के एक रूप 'थुलुकांतामन' की प्राण प्रतिष्ठा है। इसे 25 दिसंबर 2016 को सील कर दिया गया था।

- मंदिर में प्रवेश के मुद्दे पर गांव के वन्नियर और दलित समुदाय के बीच सांप्रदायिक तनाव की स्थिति पैदा हो जाने के बाद मंदिर को बंद करने का फैसला लिया गया।