डाटा लीक मामले पर मोदी सरकार सख्त, कैंब्रिज एनालिटिका को नोटिस जारी

नई दिल्ली ( 24 मार्च ): फेसबुक डाटा लीक मामले में मामला गरमाता जा रहा है। इस बीच सरकार ने कड़ा रुख अख्तियार करते हुए ब्रिटेन की कैंब्रिज एनालिटिका को नोटिस जारी किया है। सरकार ने कंपनी से जानना चाहा है कि क्या उसने फेसबुक पर मौजूद भारतीयों की जानकारी का इस्तेमाल भी किया है? नोटिस में सरकार ने छह सवाल पूछे हैं। कैंब्रिज एनालिटिका को जवाब देने के लिए 31 मार्च 2018 तक का समय दिया गया है।

कैंब्रिज एनालिटिका पर आरोप है कि उसने अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में एक राजनीतिक दल के फायदे के लिए फेसबुक के यूजर्स के डाटा का इस्तेमाल राजनीतिक प्रोफाइल तैयार करने के लिए किया। गौरतलब है कि अमेरिका में हुए इस खुलासे के बाद केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक व सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने बुधवार को फेसबुक के सीईओ मार्क जुकरबर्ग को सख्त चेतावनी जारी की थी। प्रसाद ने कहा था कि अगर भारत की चुनावी प्रक्रिया को किसी गड़बड़ तरीके से प्रभावित करने की कोशिश होती है तो इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अगर जरूरी हुआ तो कठोरतम कार्रवाई की जा सकती है। भारत में आइटी कानून के तहत तमाम ऐसे प्रावधान है, जिसका इस्तेमाल इसके लिये किया जा सकता है।

इसके बाद से ही सरकार सोशल साइटों पर डाटा की सुरक्षा को लेकर और सतर्क हो गई थी। गुरुवार को ही सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री ने मंत्रालय के अधिकारियों के साथ बैठक कर अन्य सोशल साइटों की निगरानी बढ़ाने और डाटा की सुरक्षा के पर्याप्त उपाय करने का निर्देश भी दिया था। इसी के मद्देनजर शुक्रवार को सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने कैंब्रिज एनालिटिका को नोटिस जारी करके फेसबुक के संदर्भ में भारतीयों की जानकारी के इस्तेमाल को लेकर सवाल पूछे हैं।

सरकार ने अपने नोटिस में स्पष्ट कहा है कि भारतीय लोकतंत्र और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर देश को गर्व है और इसमें किसी प्रकार की छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं की जा सकती। इस प्रक्रिया में शामिल होने वाले प्रत्येक व्यक्ति व संस्था के लिए गोपनीयता, डाटा की गरिमा और सुरक्षा की व्यवस्था बनाये रखना कानूनन जरूरी है। इस संदर्भ में डाटा के गैरकानूनी इस्तेमाल पर सरकार कानूनी कार्यवाही कर सकती है।

सरकार ने कैम्बि्रज एनालिटिका से पूछे हैं ये छह सवाल 1. डाटा ब्रीच के मामलों में क्या कंपनी भारतीयों के डाटा का इस्तेमाल कर रही है? 2. डाटा ब्रीच के मामलों में कंपनी किसके लिए काम कर रही है? 3. उन्हें यह डाटा किस तरह प्राप्त हुआ? 4. क्या व्यक्तियों से मंजूरी ली गयी? 5. इस तरह से जो डाटा जुटाया गया, उसका कैसे इस्तेमाल किया गया? 6. इस तरह के डाटा के आधार पर क्या कोई प्रोफाइलिंग की गयी थी?