मोबाइल सर्विस प्रोवाइडर कम्पनियों ने SC में कहा, 'कॉल ड्राप के लिए हम जिम्मेदार नहीं'

नई दिल्ली (10 मार्च):  कॉल ड्राप के मामले में मोबाइल सर्विस प्रोवाइडर कम्पनियों ने सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रखा है। जिनका कहना है कि इस समस्या के लिए मोबाइल कंपनियां जिम्मेदार नहीं हैं। 

रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनियों ने कहा कि कॉल ड्राप होने के पीछे कई कारण हैं। इनमें उपभोक्ताओं के इस्तेमाल किए गए मोबाइल फोन, मोबाइल टावर से दूरी, सुरंग, जैमर लगे एरिया या फिर मोबाइल कंपनियों के केबल कटने जैसे कारण जिम्मेदार हैं। ये मामला बिजली की तरह नहीं बल्कि रेडियो वेव पर आधारित है।

कंपनियों की ओर से कहा गया कि दुनिया में ऐसा कोई देश नहीं जहां कॉल ड्राप न होती हो। कोलंबिया एकमात्र ऐसा देश है जहां कॉल ड्राप पर जुर्माना लगाया जाता है। दुनिया में हर जगह 2 से 5 फीसदी कॉल ड्राप का औसत माना जाता है। भारत में यह 2 फीसदी है। जब 2 फीसद स्वीकार्य है तो हम पर ये जुर्माना क्यों लगाया जा रहा है?

सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले हुई सुनवाई में कंपनियों की याचिका पर टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (ट्राई) को नोटिस जारी किया था। लेकिन हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगाने से इंकार कर दिया था। हाईकोर्ट ने टेलिकॉम कंपनियों की ओर से दायर याचिका को खारिज करते हुए कहा था, कि उन्‍हें काल ड्राप होने पर ग्राहकों को मुआवजा देना ही होगा। हाई कोर्ट ने कहा कि कंपनियों को अपने उपभोक्‍ताओं को यह मुआवजा 1जनवरी 2016 से देना होगा। कंपनियों की दलील थी कि ट्राई का ये आदेश मनमाना और गैरकानूनी है, इसे रद्द किया जाए।

ट्राई ने 16 अक्टूबर 2015 को आदेश जारी किया। जिसमें कहा कि टेलीकॉम सर्विस कंपनियां, अगर काल ड्राप होती है तो 1 रुपया उपभोक्ता को बतौर मुआवजा देंगी। जो एक दिन में 3 रुपये हो सकता है। इसके खिलाफ मोबाइल कंपनियों ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।