Blog single photo

तेलंगाना में TRS की जीत के ये हैं 5 बड़े कारण

तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) के अध्यक्ष के चंद्रशेखर राव (केसीआर) के भतीजे टी हरीश राव ने मंगलवार को तेलंगाना विधानसभा चुनाव में सिद्दीपेट सीट से 1.20 लाख मतों के अंतर से जीत दर्ज की। केसीआर मंत्रिमंडल में सिंचाई मंत्री रहे हरीश ने तेलंगाना जन समिति (टीजेएस) के अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी भवानी मरिकांति को कुल 1,20,650 मतों के अंतर से हराया।

न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (11 दिसंबर):  तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) के अध्यक्ष के चंद्रशेखर राव (केसीआर) के भतीजे टी हरीश राव ने मंगलवार को तेलंगाना विधानसभा चुनाव में सिद्दीपेट सीट से 1.20 लाख मतों के अंतर से जीत दर्ज की। केसीआर मंत्रिमंडल में सिंचाई मंत्री रहे हरीश ने तेलंगाना जन समिति (टीजेएस) के अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी भवानी मरिकांति को कुल 1,20,650 मतों के अंतर से हराया।

हरीश ने पहली बार 2004 में यहां हुए उपचुनाव में जीत दर्ज की थी। उस समय इस सीट को केसीआर ने छोड़ दिया था। उसके बाद से, हरीश ने इस विधानसभा क्षेत्र में अपनी पकड़ काफी मजबूत कर ली। 46 वर्षीय नेता ने चुनाव दर चुनाव अपना मत प्रतिशत बढ़ाया। 2014 में, वह 95,000 मतों के अंतर से चुने गए थे, जो कि राज्य में सबसे ज्यादा मतों के अंतर में से एक था।

2014 में केसीआर की पार्टी को 63 सीटें मिली थीं, लेकिन इस बार उससे तकरीबन दो दर्जन अधिक सीटें टीआरएस को मिलती दिख रही हैं, जबकि पिछले चुनाव अलग तेलंगाना राज्य के लिए हुए सफल आंदोलन की पृष्ठभूमि में हुए थे।

तेलंगाना में TRS की जीत के ये हैं 5 बड़े कारण

-किसानों के अनुकूल नीतियां: चंद्रशेखर राव ने अपने साढ़े चार साल के कार्यकाल में किसानों के लिए कई योजनाएं शुरू कीं। इनमें से सबसे अधिक चर्चा दो योजनाओं की होती है। उनकी रायतू बंधु योजना की चर्चा न सिर्फ देश बल्कि कई वैश्विक आर्थिक संस्थाओं ने भी की है। दूसरे राज्यों में किसानों को दी जा रही रियायत की तुलना में चंद्रशेखर राव की सरकार ने प्रदेश के सभी किसानों को प्रति एकड़ 4,000 रुपये की आर्थिक मदद प्रति सीजन मुहैया कराने का काम किया। साल के दो सीजन में प्रदेश के किसानों को प्रति एकड़ 8,000 रुपये चंद्रशेखर राव सरकार ने दिए। तेलंगाना के किसान जो समस्याएं झेल रहे थे, उन्हें इस योजना से काफी लाभ हुआ। यही वजह है कि पिछले कुछ समय में जहां कई राज्यों में किसान आंदोलन खड़ा हुआ, वहीं तेलंगाना में ऐसा कुछ नहीं देखा गया। किसानों के लिए दूसरा बड़ा काम चंद्रशेखर राव ने मिशन काकतिया के जरिए किया। इसके तहत उन्होंने सिंचाई व्यवस्था को दुरुस्त करने का काम किया। इससे भी उन्हें काफी लाभ हुआ. टीआरएस ने अपनी सरकार के इन कार्यों को बहुत ही प्रभावी ढंग से आम लोगों तक पहुंचाने का काम भी किया।-कांग्रेस-टीडीपी गठबंधन: कांग्रेस ने टीडीपी के साथ जब गठबंधन किया तो अंकगणित उनके पक्ष में था। 2014 के विधानसभा चुनावों में इन दोनों पार्टियों का कुल वोट शेयर टीआरएस के वोट शेयर से अधिक था। इसके चलते कहा जाने लगा था कि टीआरएस पर यह गठबंधन भारी पड़ सकता है, लेकिन टीआरएस ने बहुत अच्छे से कांग्रेस-टीडीपी गठबंधन का इस्तेमाल अपने फायदे के लिए किया। टीआरएस के नेताओं ने आम लोगों के बीच यह बात पहुंचाई कि अलग तेलंगाना राज्य के गठन का सबसे अधिक विरोध करने वाले आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू इस गठबंधन के नेता हैं और अगर इस गठबंधन को कामयाबी मिलती है तो यह तेलंगाना के हक में नहीं होगा। इस वजह से जो मतदाता पिछले चुनाव में कांग्रेस के साथ थे, वे भी टीआरएस के पाले में आ गए। अब राजनीतिक जानकार कह रहे हैं कि अगर कांग्रेस टीडीपी के साथ गठबंधन करने के बजाय अकेले चुनाव लड़ती तो इससे अच्छी स्थिति में रहती।

-नेतृत्व की स्पष्टता

टीआरएस की इतनी बड़ी जीत की एक बड़ी वजह यह भी है कि यहां नेतृत्व को लेकर स्थिति बिल्कुल स्पष्ट थी। यह तय था कि टीआरएस के चुनाव जीतने की स्थिति में प्रदेश में चंद्रशेखर राव के तौर पर एक मजबूत और सक्षम नेतृत्व बरकरार रहेगा, जबकि यह स्पष्टता न तो कांग्रेस-टीडीपी गठबंधन के साथ थी और न ही भाजपा के साथ। कांग्रेस, टीडीपी और भाजपा में कोई भी एक ऐसा नेता नहीं था जिसकी पूरे तेलंगाना में अपनी एक अलग पहचान हो। टीआरएस ने अपनी चुनावी सभाओं में इस मुद्दे को भी बार-बार उठाया। पार्टी लोगों को यह समझाने में कामयाब रही कि चंद्रशेखर राव के मुकाबले प्रदेश का नेतृत्व करने के लिए कोई सक्षम विकल्प विपक्ष के पास नहीं है।

-संतुलित औद्योगिक विकास

तेलंगाना की गिनती उन गिने-चुने राज्यों में होती है जहां कृषि और उद्योग का विकास साथ-साथ चल रहा है। एक तरफ जहां किसानों की स्थिति सुधारने के लिए कई बड़ी योजनाएं चंद्रशेखर राव सरकार ने शुरू कीं तो दूसरी तरफ उद्योग जगत की पैठ और मजबूत करने के लिए भी टीआरएस सरकार ने कई काम किए। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू की छवि कारोबारी वर्ग के अनुकूल होने की वजह से उसे डर था कि कहीं निजी क्षेत्र का निवेश तेलंगाना से आंध्र प्रदेश का रुख न कर ले, लेकिन चंद्रशेखर राव ने इस मोर्चे पर भी प्रभावी ढंग से काम किया। यही वजह है कि ईज आॅफ डूइंग बिजनेस में तेलंगाना बहुत अच्छी स्थिति में है और निर्यात के मामले में भी उसकी गिनती अव्वल राज्यों में होती है। निवेश आकर्षित करने में भी तेलंगाना की स्थिति काफी अच्छी है। इन वजहों से प्रदेश में रोजगार के अवसर बढ़े और यहां के लोगों को कई आर्थिक फायदे हुए। इसका फायदा भी चंद्रशेखर राव को इन चुनावों में मिला।

-भाजपा और ओवैसी

तेलंगाना में भारतीय जनता पार्टी और असदुद्दीन ओवैसी का अकेले चुनाव लड़ना भी चंद्रशेखर राव के पक्ष में गया। भाजपा ने आक्रामक हिंदुत्व की लाइन इन चुनावों में ली। इससे नरम हिंदुत्व की बात कर रहे कांग्रेस के कुछ हिंदू वोट काटने में भाजपा को कामयाबी मिली। वहीं दूसरी तरफ ओवैसी के अकेले चुनाव मैदान में होने से कुछ जगहों पर मुस्लिम वोटों का भी बिखराव हुआ। अगर मुस्लिम वोट बैंक एकजुट होकर कांग्रेस-टीडीपी के पाले में चला जाता तो इससे चंद्रशेखर राव को मुश्किल हो सकती थी। लेकिन ओवैसी ने कुछ सीटों पर मुस्लिम वोटों को तीन हिस्सों में बांटने का काम किया। इससे कुछ मुस्लिम मत खोने के बावजूद व्यापक वोट बैंक वाली टीआरएस की जीत पहले से भी बड़ी हो गई।

NEXT STORY
Top