छत्तीसगढ से बहकर ओडिशा पहुंची अनाथ, मिला नया परिवार

नई दिल्ली(17 सितंबर): छत्तीसगढ़ के सारणगढ़ में घरेलू नौकरानी के तौर पर काम करने वाली 18 वर्षीय अनाथ युवती सोनी यादव को महानदी ने नया जीवन दे दिया। सोनी मंगलवार को अपने कुछ दोस्तों के साथ चंद्रपुर मंदिर गई थी। जैसे ही वह खुद को साफ करने नदी में उतरी, महानदी की तेज धारा उसे बहा ले गई। 

- अगले 12 घंटों तक महानदी की तेज धारा से लड़ते हुए, सोनी को 70 किलोमीटर दूर पड़ोसी राज्य ओडिशा के झारसुगुडा में एक मछुआरे ने बचा लिया। हालांकि सोनी के साथ हुई इस दुर्घटना ने उसे नया जीवन दे दिया। उसे बचाने वाले मछुआरे का परिवार अनाथ सोनी को गोद लेना चाहता है और वह भी मछुआरे परिवार के साथ रहना चाहती है।

- सारणगढ़ के पुलिस अधिकारी आरके मिश्रा ने एक अंग्रेजी अखबार से बातचीत में बताया कि इसे चमत्कार ही माना जाएगा कि पूरी रात महानदी की तेज धारा से बचते हुए सोनी जिंदा बच गई। हम सोनी को सारणगढ़ लेकर गए और उसके बयान दर्ज किए। लेकिन वह जहां काम करती थी वहां रहने के बजाय, वह उसे बचाने वाले मछुआरे परिवार के पास लौट गई।

सोनी ने पुलिस को बताया कि फिसलने के बाद वह नदी में बह गई थी। उसने खुद को बचाने की कोशिश की लेकिन नदी की धार इतनी तेज थी कि वह उसे बहा ले गई। मिश्रा ने बताया, 'सोनी ने अपने बयान में बताया कि नदी में बहने के बाद वह बेहोश हो गई और उसे कुछ याद नहीं।' सोनी को नदी से बचाए जाने के बाद अस्पताल में भर्ती किया गया लेकिन कोई गंभीर चोट नहीं होने के कारण उसे जल्दी ही छुट्टी दे दी गई।

पुलिस अधिकारी ने कहा, 'सोनी के माता-पिता की मौत के बाद उसके दादा-दादी और मौसी ने उसकी देखभाल की। वह जिस परिवार के लिए काम करती थी, उससे तीन दिन की छुट्टी लेकर वह दोस्तों के साथ चंद्रपुर मंदिर घूमने गई थी। हमें झारसुगुडा जिले के रेंगली पुलिस थाने से फोन आया और बताया गया कि कुसमेल गांव में मछुआरे ने लड़की को बचा लिया है।' रायगढ़ के SP बीएन मीणा ने कहा, 'ये विश्वास करना काफी कठिन है कि कोई इतनी देर तक पानी में जिंदा बचा रह सकता है। अभी तक हम लड़की के बयान पर ही विश्वास कर रहे हैं क्योंकि घटनास्थल पर की गई जांच से उसका बयान मेल खाता है।'