आपके ऐप की सहायता से पैसा निकाल सकते है जालसाज, बैंकों का अलर्ट

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न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली(14 अगस्त): आपको अब साइबर चोरों से सावधान रहने की जरूरत है, क्योंकि आपके एप के जरिए चोर आपकों बड़ा नुकसान भी दे सकता है। इसलिए भारतीय रिजर्व बैंक ने इस साल की शुरुआत में चेतावनी जारी करते हुए कहा था कि लोगों को रिमोट ऐप  से चौकस रहने की जरूरत है। इस ऐप के जरिए जलसाज कहीं भी बैठकर यूजर के फोन को ऐक्सेस कर उसका पूरा कंट्रोल अपने ले लेते हैं। आरबीआई की इस वॉर्निंग के बाद एचडीएफसी, ICICI और ऐक्सिस बैंक ने ऐडवाइजरी जारी कर दी थी। इस ऐप का इस्तेमाल जालसाज UPI के जरिए पैसे की चोरी करने के लिए करते हैं। हालांकि ऐनीडेस्क ऐप ना तो कोई मलीशस ऐप है और ना हीं इसमें किसी प्रकार का खतरा है। 

आईटी सेक्टर में काम करने वाले प्रफेशनल्स के लिए यह ऐप का काफी काम का है, क्योंकि यह किसी भी मोबाइल या लैपटॉप तो कहीं से ऐक्सेस करने की सहूलियत देता है। आम भाषा में कहें तो यह एक स्क्रीन शेयरिंग प्लैटफॉर्म है। ऐसा ही एक दूसरा ऐप है टीम व्यूअर। यह भी ऐनीडेस्क के जैसे ही काम करता है। प्रफेशनल काम के लिए इस ऐप का काफी इस्तेमाल किया जाता है। वहीं अगर जलसाजों के हाथ अगर यह लग जाए तो इसका वे काफी गलत तरीके से इस्तेमाल कर सकते हैं। आइए जानते हैं कैसे ये साइबर क्रिमिनल इन ऐप के जरिए लोगों के बैंक अकाउंट से पैसे की चोरी कर रहे हैं।

दो तरह से होती है धोखाधड़ी

जालसाज एक बैंक एग्जिक्यूटिव बनकर फोन करते हैं। कई बार ऐसे भी मामले सामने आए हैं जिनमें गूगल पर मौजूद गलत कस्टमर केयर नंबर पर यूजर खुद ही फोन कर देते हैं। इन दोनों ही मामलों में फर्जी बैंक एम्पलॉयी बने हुए ठग यूजर को ऐनी डेस्क या टीम व्यूअर क्विक सपॉर्ट ऐप डाउनलोड करने के लिए कहते हैं।9 अंक वाले कोड का है खेल

ऐप के डाउनलोड होने के बाद इन साइबर क्रिमिनल्स को 9 अंकों वाले रिमोट डेस्क कोड की जरूरत पड़ती है। यह यूजर को ह अंक बताने के लिए आसानी से मना लेते हैं। 9 अंक वाला कोड मिलते ही ये यूजर के मोबाइल या कंप्यूटर स्क्रीन को आसानी से देख और कंट्रोल कर सकते हैं। इतना ही नहीं ये स्क्रीन को रिकॉर्ड भी कर सकते हैं।चोरी हो जाते हैं बैंक डीटेल

स्क्रीन शेयर होने के साथ जालसाज यूजर की मोबाइल और कंप्यूटर ऐक्टिविटी को मॉनिटर कर सकते हैं। यह बैंक डीटेल चोरी करने का सबसे आसान तरीका है। जैसे ही यूजर अपने बैंक अकाउंट का यूजरनेम और पासवर्ड डालते हैं वैसे ही ये जालसाज उसे नोट कर लेते हैं। UPI पेमेंट ऐप के लिए यही तरीका अपनाया जाता है। इसमें सबसे चिंता वाली बात यह है कि ये ऐप फोन के लॉक होने के बाद भी बैकग्राउंड में चलते रहते हैं।

आईफोन की तुलना में ऐंड्रॉयड डिवाइसेज पर ऐसे अटैक का खतरा ज्यादा है। ऐंड्रॉयड पर ऐनीडेस्क स्कैमर्स आसानी से स्क्रीन को मॉनिटर और रिकॉर्ड कर सकते हैं। वहीं दूसरी आईफोन ऐनीडेस्क ऐप को स्क्रीन कास्ट नहीं करने देता।

डाउनलोड करने से पहले समझ लें ऐप

स्क्रीन शेयर करने वाले किसी भी ऐप को डाउनलोड करने से पहले उसके काम करने के तरीके को ढंग से समझ लेना बेहतर रहता है। बिना जानकारी ये ऐप यूजर को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसके साथ ही इस बात का जरूर ध्यान रखें कि कोई भी बैंक अपने ग्राहकों को ऐप डाउनलोड करने के लिए नहीं कहता।