चैंपियन बनने से तीन कदम दूर टीम इंडिया

नई दिल्ली(4 फरवरी): अंडर-19 वर्ल्ड कप को जीतने से टीम इंडिया सिर्फ तीन कदम दूर है। टीम इंडिया अगर ये विश्व कप जीत जाती है तो चौथी बार ये ट्रॉफी भारत में आएगी।

पहले आयरलैंड, फिर न्यूजीलैंड और उसके बाद नेपाल को हराकर भारत ने क्वार्टरफाइनल में जगह बनाई।  टूर्नामेंट में अबतक भारतीय गेंदबाजों का दबदबा इस कदर रहा कि तीनों ही मैच में भारतीय टीम ने विरोधी को 50 ओवर तक नहीं खेलने दिया है। भारतीय टीम के इस जबर्दस्त अटैक की बागडोर खलील अहमद और आवेश खान की जोड़ी संभाल रही है। इंदौर और टोंक के इस मीडियम पेसर जोड़ी की खासियत ये है कि एक दबाव बनाता है तो दूसरा विकेट निकालता है। वर्ल्ड कप में शुरुआती तीन मैचों के बाद आवेश खान टूर्नामेंट के दूसरे सबसे सफल गेंदबाज हैं। हालांकि खलील अहमद को अबतक विकेट तो नहीं निकाल पाए हैं, लेकिन दबाव बनाने में जरूर सफल रहे।

दरअसल, इनका ये तालमेल सिर्फ मैदान या होटल के रूम में एकसाथ रहने की वजह से ही नहीं बना है। बल्कि ये मैदान के बाहर भी ज्यादातर समय साथ ही बिताते हैं। हालांकि यहां तक पहुंचने के लिए दोनों को कड़े इम्तेहान से गुजरना पड़ा है। ये टीम में चुनाव के बाद खलील के घर जश्न का माहौल है। परिवार के लिए उनका चयन जिंदगी की सबसे बड़ी खुशी है।

हालांकि खलील के पिता खुर्शीद अहमद चाहते थे कि बेटा बड़ा होकर डॉक्टर बने, लेकिन खलील का ध्यान किताबों से दूर क्रिकेट के मैदान पर लगा रहता था। पिता ने कई बार डांटने और समझाने की कोशिश की। आखिरकार जीत खलील की हुई, और मां-पिता ने भी बेटे की जीत को ही अपनी जीत मान ली। इंदौर के आवेश खान की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। अंडर-19 में चुनाव के बाद परिवार की जैसे सारी मुराद पूरी हो गई।

आवेश को 10 साल की उम्र से क्रिकेट खेलनें का ऐसा चश्का लगा कि हर वक्त वो बैट और गेंद के आसपास ही नजर आता। शुरुआत में तो घरवालों ने थोड़ी डांट-डपट कर पढ़ाई की ओर ध्यान लगाने की कोशिश की। लेकिन कोई बदलाव ना होता देख उसे इंदौर की एक क्रिकेट एकेडमी में भर्ती करा दिया।

शुरुआती दिनों में आवेश का क्रिकेट के प्रति जुनून देखकर डर लगनें लगा था कि कहीं वो खेल-खेल में पढ़ाई से पूरी तरह दूर ना हो जाए। मगर आवेश नें पढ़ाई और खेल में तालमेल बनाए रखा। अंडर-19 वर्ल्ड कप में भारतीय उम्मीदों का भार इन दो मजबूत कंधों पर है। जिसे अबतक आवेश और खलील ने शानदार दिशा दी है। अब इंतजार है कि ये दोनों वर्ल्ड कप के साथ घर आएं और सीनियर टीम में अपना दावा मजबूत करें।