टीम इंडिया के ओपनिंग बल्लेबाजों को लेकर कोहली ने दिया बड़ा बयान

नई दिल्ली(28 फरवरी): टीम इंडिया जब विजय रथ पर सवार थी तो सब कुछ सही नजर आ रहा था, लेकिन पुणे में आस्ट्रेलिया से पहला टेस्ट 333 रन के बड़े अंतर से ढाई दिन के अंदर हारने के बाद ओपनिंग जोड़ी की नाकामी अब खुलकर सामने आ गई है। 

- भारतीय टीम पुणे टेस्ट में पहली पारी में 105 और दूसरी पारी में 107 रन पर सिमट गई। दोनों ही पारियों में ओपनिंग साझेदारी की नाकामी भारतीय हार का सबसे बड़ा कारण रही। भारत को दोनों पारियों में एक बार भी अच्छी शुरूआत नहीं मिल पाई जिसका नतीजा बाद के बल्लेबाजों पर दबाव के रूप में नजर आया। न्यूजीलैंड, इंग्लैंड और बंगलादेश के खिलाफ पिछली तीन सीरीज में ओपनिंग में कई खिलाडिय़ों को आजमाया गया लेकिन स्थिरता कहीं भी नजर नहीं आई।

- इन सीरीज में लोकेश राहुल, मुरली विजय, शिखर धवन, गौतम गंभीर और पार्थिव पटेल को आजमाया गया लेकिन जिस अच्छी शुरूआत की जरूरत थी वह अब तक 10 टेस्ट मैचों में सिर्फ एक मैच में ही देखने को मिल पाई।  भारत ने इंग्लैंड के खिलाफ चेन्नई में हुए पांचवें और अंतिम टेस्ट में पहले विकेट के लिए 152 रन की साझेदारी की जो पिछले 10 टेस्टों में एकमात्र शतकीय साझेदारी थी। उस मैच में राहुल ने 199 और पार्थिव ने 71 रन बनाए थे। आस्ट्रेलिया के खिलाफ पुणे की हार को देखा जाए तो मुरली और राहुल की जोड़ी पहली पारी में ओपनिंग साझेदारी में 26 रन और दूसरी पारी में 10 रन ही जोड़ पायी। पहली पारी में मुरली ने 10 और दूसरी पारी में दो रन बनाए जबकि राहुल ने पहली पारी में 64 और दूसरी पारी में 10 रन बनाए।

- बंगलादेश के खिलाफ हैदराबाद में खेले गए एकमात्र टेस्ट को देखा जाए तो ओपनिंग साझेदारी में दो रन जुड़े थे। इससे पहले इंग्लैंड के खिलाफ पांच मैचों की सीरीज में राजकोट में खेले गए पहले टेस्ट में मुरली और गंभीर ने पहली पारी में 68 और दूसरी पारी में शून्य रन जोड़े। गंभीर इसके बाद भारतीय टीम से बाहर हो गए। विशाखापत्तनम में खेले गये दूसरे टेस्ट में पहली पारी में छह और दूसरी पारी में 16 रन की ओपनिंग साझेदारी हुई। इस टेस्ट में मुरली ने 20 और तीन तथा राहुल ने शून्य और 10 रन बनाए। मोहाली में खेले गए तीसरे टेस्ट में 39 और सात रन की ओपनिंग साझेदारी हुई। मुरली ने 12 और शून्य तथा पार्थिव ने 42 और 67 रन बनाए।