कोई नहीं लेता इनकी खबर, प्रशासन को आईना दिखाने का एक टीचर ने उठाया बीड़ा

नई दिल्ली (6 सितंबर): जहां एक ओर करोड़ों रूपए खर्च करने के बाद भी देश में शिक्षा की हालत बदहाल है वही सर्व शिक्षा अभियान को आईना दिखा रहे है शिक्षक दीपेश व्यास। उत्तर प्रदेश के जालौन जिले के दीपेश व्यास पेशे से एक महाविद्यालय प्राइवेट शिक्षक है। लेकिन उन्होंने एक सराहनीय मुहिम शुरू की है। वह सात साल से लगातार कबाड़ बीनने वाले निरक्षर बच्चों को मुक्त शिक्षा देने का काम कर रहे है।

- निरक्षर बच्चों की अंधियारी जिंदगी में शिक्षा की रोशनी फैलाने के अभियान में उन्हें सरकार से कोई मद्दद नहीं मिली। - यहाँ तक की बच्चों के लिए किताबे उपलब्ध करने के लिए उन्होंने कई बार जिला प्रशासन से गुहार लगायी पर कोई सुनवाई नहीं हुयी। - आखिरकार उन्होंने अपने निजी खर्चे से बच्चों को शिक्षा देने की ठान ली और उन्होंने अपने पैसो से बच्चो के लिए कॉपी किताबे और पेन पेंसिल खरीदी और बच्चों को निरंतर शिक्षा देने का काम जारी रखा। - जालौन जनपद के मुख्यालय उरई में जेल रोड पर स्थित रामकुण्ड के पास झारखंड के कुछ परिवार रहते है। - ये परिवार कबाड़ बीनने के काम करते और इनके बच्चे भी शहर में जगह जगह कूड़े के ढेरो से कबाड़ बीनने का काम करते है। - जिन बच्चों का शिक्षा से दूर दूर तक का कोई भी नाता नहीं है। - इन्ही के लिए शिक्षक दीपेश व्यास ने एक बीच का रास्ता निकाला और उन्होंने बच्चों को शाम के बक्त पढ़ाने के लिए उनके माँ बाप को राजी कर लिया। - इसके बाद से बच्चों को शिक्षा देने का कार्य लगातार पिछले 7 वर्षो ने कर रहे हैं। - लेकिन आज तक प्रशासन ने इस उत्साही एवं समाज के लिए कुछ कर गुजरने वाले शिक्षक की कोई मदद नहीं की। ना ही शिक्षा विभाग ने भी कभी सुध ली।