झोपड़ी से निकली और पहुंची अमेरिका...

नई दिल्ली(6 सितंबर): जानकी ने सपने में भी नहीं सोचा था कि झोपड़ी में जिंदगी गुजारते-गुजारते एक दिन वो अमेरिका तक पहुंच जाएगी। जेंट्स साइकिल से चलने वाली जानकी बीएमडब्लू और ऑडी से घूमेगी, लेकिन यह सपना पूरा हुआ। उसकी झोपड़ी में कभी लाइट नहीं आई और वो अमेरि‍का की जगमगाती रोशनी में एक साल गुजार आई। वह कहती हैं कि अगर किस्‍मत ने साथ दिया तो अमेरिका में ही सेटेल होने का इरादा है।   टीचर्स और प्रेरणा स्‍कूल की मदद से बदली जिंदगी   - जानकी एएसफ (अमेरिकन फील्‍ड सर्विस) के अंदर चलने वाले प्रोग्राम वाईईएस (यूथ एक्‍सचेंज एंड स्‍टडी) के तहत अमेरिका गई थी।   

- वह कहती हैं, कि प्रेरणा स्‍कूल हर साल कुछ बच्‍चों को स्टडी एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत अमेरिका, लंदन और ऑस्ट्रेलिया भेजता है। 

- इस स्‍कूल में हम जैसे गरीब बच्‍चों को फ्री में पढ़ाया जाता है।

- टीचर्स और स्‍कूल की मदद से मैं अमेरिका जा पाई।     क्‍या कहते हैं टीचर्स   - प्रेरणा स्‍कूल में जानकी को पढ़ाने वाले टीचर्स का कहना है कि वह बहुत ही ब्रिलियंट स्‍टूडेंट है।

- उन्‍हें खुशी है कि जानकी की ट्रिप सक्‍सेजफुल रही।      अमेरिका से लौटकर इंडिया में एडजेस्ट करना था मुश्किल   - प्रेरणा स्कूल से स्‍कॉलर प्रोग्राम के तहत जानकी एक साल के लिए अमेरिका गई। इस एक साल में जानकी हमेशा एसी में रही बीएमडब्लू और ऑडी जैसी कारों में घूमीं।

 प्रोग्राम ख़त्म होते ही जानकी को वापस आना पड़ा। एक साल अमेरिका में र‍हकर वापस यहांं के माहौल में एडजेेस्ट करना मुश्किल हो रहा था। 

- अब स्टडी हॉल से बीबीए कर रही है।    जानकी के पिता है मजदूर और मां हैं काम वाली बाई   - जानकी के पिता बराती साहू एक मजदूर हैं और मां कमला साहू घरों में चूल्हा चौका करती हैं।

- सृजन विहार कॉलोनी में 12 बाई 6 की एक कच्ची झोपड़ी है, जिसमें गुजारा करना बहुत मुश्किल है।

- झोपड़ी सड़क के किनारे है, इसलिए खाना बनाने के लिए चूल्हा सड़क पर ही बना हुआ है।

- बारिश में गुजारा बहुत मुश्किल हो जाता है।

- आज तक उसकी झोपड़ी में लाइट नहीं आई है।   एक एचआर बनना चाहती हैं जानकी   - जानकी एक सक्सेसफुल एचआर बनना चाहती हैं और परिवार को एकोनोमिकली सपोर्ट करके एक घर खरीदना चाहती हैं।

- वह आत्‍मनिर्भर बनना चाहती हैं। समाज में फैली कुरीतियों को दूर करना चाहती है

- जानकी को अमेरिका की लाइफ स्टाइल पसंद है।

- वो कहती हैं वहां महिलाओं को पूरी आजादी है, किसी तरह की कोई कुरीति नहीं है। 

- वहां के लोग अपने देश को साफ सुथरा रखने में यकीन रखते हैं।   प्रेरणा स्‍कूल से बच्‍चे जाते रहते हैं विदेश   - घरों में काम करने वाले बच्चों को पढ़ाने वाले तो बहुत मिल जाते हैं, लेकिन इस लायक बनाना कि वह बच्चा विदेश जाकर पढ़ाई करें यह बहुत ही कम देखने को मिलता है। 

- लखनऊ में प्रेरणा स्कूल कई सालों से यह काम कर रहा है। यहां बच्‍चे स्टडी एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत अमेरिका, लंदन और ऑस्ट्रेलिया तक जाते हैं। यह स्कूल लखनऊ के एक प्रतिष्ठित स्कूल के स्टडी हाल के कैंपस में चलता है। 

- बड़े घरों के बच्चों की छुट्टी होने के बाद गरीब बच्चों के लिए यह स्कूल चलाया जाता है।