आखिर क्या है विशेष राज्य का दर्जा? जिसे लेकर मोदी से खफा हैं चंद्राबाबू


नई दिल्ली (8 मार्च):
आंध्र को विशेष विशेष राज्य का दर्जा नहीं मिलने से नाराज टीडीपी के दो मंत्रियों ने थोड़ी देर पहले मोदी सरकार से इस्तीफा दे दिया है। शाम 6 बजे के करीब टीडीपी के दोनों मंत्री प्रधानमंत्री आवास पहुंचे और अपना इस्तीफा सौंप दिया।

टीडीपी और बीजेपी में झगड़े की जड़ विशेष राज्य का दर्जा है। टीडीपी चाहती है आंध्रप्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा मिले। सरकार कहती है ये संभव नहीं है।

सबसे पहले ठीक से समझिए किसी राज्य को विशेष राज्य का दर्जा मिलने पर केंद्र से क्या सुविधाएं मिलती हैं...

- केंद्र राज्यों को जो अनुदान देता है वो 70 और 30 के अनुपात में होता है।
- मतलब कोई योजना लागू करने के लिए केंद्र सरकार उसका 70 फीसदी हिस्सा खुद देती है 30 फीसदी हिस्सा राज्य को खर्च करना पड़ता है।
- विशेष राज्य का दर्जा मिलने पर अनुदान का अनुपात 90 और 10 का हो जाता है।
- मतलब किसी योजना को लागू करने के लिए 90 फीसदी अनुदान केंद्र देगा। 10 फीसदी वो राज्य खर्च करेगा।
- इसके साथ केंद्र विशेष राज्य के दर्जे वाले राज्य को अलग से वक्त-वक्त पर विशेष अनुदान देता है।
- केंद्र की ज्यादातर योजनाएं इस राज्य में लागू की जाती हैं। राहत और बचाव के काम में ऐसे राज्य को विशेष ध्यान रखा जाता है।

अब किन राज्यों को विशेष राज्य का दर्जा देने का प्रावधान है वो समझिए...

- संविधान में विशेष राज्य के दर्जे का प्रावधान नहीं, लेकिन पहाड़ी, दुर्गम, कम जनसंख्या घनत्व, आदिवासी बहुल, पिछड़े, प्रति व्यक्ति आय और इंटरनेशनल बॉर्डर से जुड़े राज्यो को विशेष राज्य का दर्जा मिलता रहा है।