बजट में मिलेगी राहत, टैक्स स्लैब का बढ़ सकता है दायरा!

नई दिल्ली (18 जनवरी): नोटबंदी के बाद सरकार के पास बड़ी तादाद में कैश आया है, जिसको ध्यान में रखते हुए सरकार बजट में आम जनता को कुछ राहत दे सकती है। सूत्रों के अनुसार, आरएसएस को भारतीय मजदूर संघ ने कुछ मांगे दी है, जो बजट में दिखाई दे सकती है।

भारतीय मजदूर संघ ने इनकम टैक्स स्लैब को 5 लाख रुपये करने की मांग की है। इसी के साथ उनका कहना है कि सरकार को लेबर और सोशल ग्रुप के बारे में बजट में कुछ बड़े ऐलान करने चाहिए।

उम्मीद की जा रही है वित्त मंत्री अरुण जेटली इस बार के बजट में मध्यवर्गीयों को लाभ दे सकते हैं। इस संबंध में पहले भी रिपोर्ट्स भी चुकी है, जिनमें कहा गया है कि मोदी सरकार इस टैक्स छूट के नियम, टैक्स स्लैब में परिवर्तन कर सकती है।

आइए जानते हैं कि उन 5 चीजों के बारे में जिनकी घोषणा इस बजट में मिडिल क्लास को ध्यान में रखकर हो सकती है।

1 कर योग्य आय की सीमा में वृद्धि

वर्तमान में ढाई लाख तक की इनकम को कोई टैक्स नहीं देना होता है। अगर इस बार यह लिमिट बढ़ाई जाती है तो इसका फायदा कम आय वाले टैक्स दाताओं को हो सकता है, जिसमें मिडिल क्लास भी शामिल है।

2 टैक्स स्लैब का पुनर्गठन

टैक्स स्लैब का पुनर्गठन शहरी मध्यम वर्ग के लिए एक बड़ा मरहम साबित होगा। वर्तमान में 2.50 से 5 लाख तक की आमदानी पर 10 प्रतिशत, 5 से 10 लाख पर 20 प्रतिशत और 10 लाख से ऊपर की आय पर 30 पर्सेंट टैक्स लगता है। पहले के दो टैक्स स्लैब का दायरा बढ़ाने या रेट को कम करने की जरुरत है।

3 भत्ते पर छूट की सीमा बढ़ाई जाए

सैलरी पाने वालों कर्मचारियों के लिए नियोक्ता की ओर से कुछ भत्तों में टैक्स छूट दी जाती है। इनमें चिल्ड्रेन एजुकेशन, यात्रा भत्ता, चिकित्सीय अदायगी, हाउस रेंट और लीव ट्रैवल शामिल है। पिछले काफी समय से भत्तों की सीमा फिक्स है और मुद्रास्फीति को देखते हुए इसमें संशोधन की जरुरत है।

4 धारा 80 सी के तहत कटौती बढ़ाएं

वर्तमान में इनकम टैक्स की धारा 80C के तहत 1,50,000 से 3 लाख तक कटौती की जा सकती है। अगर वित्त मंत्री अरुण जेटली इस सीमा को बढ़ाते है तो घरेलू बचत में बढ़ोत्तरी होगी क्योंकि इसका निवेश किया जाएगा।

5 वरिष्ठ नागरिकों के लिए छूट की सीमा में परिवर्तन

वर्तमान में सीनियर सिटीजन जिनकी उम्र 60 से 80 के बीच है उनको तीन लाख रुपए तक की आय पर और 80 साल की उम्र से अधिक वालों को 5 लाख तक की आय पर कोई टैक्स नहीं देना होता है। इस लिमिट को बढ़ाकर क्रमश: 4 लाख और 650,000 लाख की जा सकती है।