आयकर विभाग कैश बिक्री में अचानक उछाल दिखाने वाली कंपनियों की करेगा जांच

नई दिल्ली ( 23 फरवरी ): प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 8 नवंबर 2016 की आधी रात से 500-1000 के पुराने नोटों पर बैन लगा दिया था। उसके बाद से कालेधन को खपाने के कई तरीके सामने आए। आयकर विभाग की उन कारोबारी फर्मों पर निगाह है, जिन्होंने नवंबर-दिसंबर में अपनी नकदी ब्रिकी में अचानक उछाल दिखा रखा है विभाग ने किसी तरह की संभावित आयकर चोरी को रोकने के लिए यह कदम उठाया है। अब सरकार इन कारोबारियों और कंपनियों को पकड़ने में जुट गई है।

एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी मुताबिक कर विभाग नकद बिक्री में असामान्य बढ़ोतरी वाले प्रत्येक मामले मामले की पिछले महीनों की बिक्री और स्टॉक से मिलान करेगा ताकि कारोबार में काले धन के जरिये लेनदेन पकड़ी जा सके। इस तरह के सभी कारोबारी और कंपनियां कर अधिकारियों की शक के दायरे में हैं।

अधिकारी ने कहा कि ऐसे तमाम मामले सामने आये हैं जिनमें अनायास बिक्री बढ़ने का दावा करके ज्यादा टैक्स (वैट व उत्पाद शुल्क) चुकाया गया है। गौरतलब है कि नोटबंदी की घोषणा के साथ ही सरकार ने बंद हुए 500 और 1000 रुपये के पुराने नोटों के जरिये कुछ वैधानिक व अनिवार्य भुगतान करने की अनुमति दी थी।

अधिकारी के अनुसार कर अधिकारी इस बात का सत्यापन करेंगे कि नवंबर व दिसंबर में नकद बिक्री पिछले साल की बिक्री के अनुपात में सामान्य है या असामान्य रूप से ज्यादा। इसके लिए अधिकारी कंपनियों और फर्मों की मासिक बिक्री व उधार बिक्री के अलावा उसके बैंक ट्रांजैक्शन का विवरण खंगालेंगे।

जिससे नकद लेनदेन और फर्जी बिक्री पकड़ी जा सके। अधिकारी ने कहा कि इस पड़ताल का मकसद नोटबंदी के 50 दिनों के दौरान व्यापारिक संस्थानों के जरिये काले धन को सफेद करने वालों को पकड़ना है। 

नवंबर और दिसंबर के दौरान अनजान लोगों को नकद बिक्री में असामान्य बढ़ोतरी होने के मामले आयकर विभाग की नजर में भी आने लगे हैं। किसी कंपनी या फर्म के बैंक खाते में जमा की गई नकदी किसी अन्य खाते में ट्रांसफर की गई है लेकिन इसका कारोबार से कोई लेना-देना नहीं है तो भी अधिकारी जांच कर सकते हैं। स्टॉक उपलब्ध न होने या फर्जी खरीद दिखाकर ज्यादा स्टॉक दिखाने की चालें भी उनकी नजर में होंगी।

अधिकारी के अनुसार इन जांचों से बचने के लिए आम लोग, कंपनी और फर्में भी प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत अपनी नकदी की घोषणा कर सकते हैं। इस योजना में उन्हें 50 फीसद टैक्स भरना होगा और 25 फीसद राशि बिना ब्याज बैंक में जमा करनी होगी।