भारत सहिष्णु देश, मुस्लिम कट्टरवाद पर भी करें बात: तस्लीमा

नई दिल्‍ली (10 जनवरी): बांग्लादेश की लेखिका तस्लीमा नसरीन का कहना है कि भारत एक सहिष्णु देश है, जहां कुछ असहिष्णु लोग रहते हैं। लेकिन वक्त आ गया है जब हिंदू कट्टरतावाद के साथ ही मुस्लिम कट्टरवाद पर भी ध्यान केंद्रित किया जाए।

पश्चिम बंगाल के मालदा में हाल में हुई हिंसा का जिक्र करते हुए तस्लीम ने कहा कि मेरा मानना है कि भारत एक सहिष्णु देश है। लेकिन कुछ लोग असहिष्णु हैं। हर समाज में कुछ लोग असहिष्णु होते हैं। अभिव्यक्ति की शत-प्रतिशत स्वतंत्रता होनी चाहिए, भले ही इससे कुछ लोगों की भावनाएं आहत ही क्यों न होती हों। उन्‍होंने कहा कि अगर हम अपना मुंह नहीं खोलेंगे तो समाज विकास नहीं करेगा। हमें समाज को बेहतर बनाने के लिए महिलाओं से घृणा करने वालों का, धार्मिक कट्टरवादियों का और समाज की सभी बुरी शक्तियों का विरोध करना होगा।

तस्लीमा ने दिल्ली साहित्य समारोह में 'कमिंग ऑफ द एज ऑफ इंटालरेंस' विषय पर हुए विचार-विमर्श में ये बातें कही। उन्‍हें बांग्लादेश में कट्टरपंथियों के विरोध का सामना करना पड़ा था। उनके उपन्यास 'लज्जा' पर धार्मिक भावनाएं भड़काने का आरोप लगा था। उन्हें धमकियां दी गई थीं। इस वजह से उन्हें देश छोड़ना पड़ा।

सुधींद्र कुलकर्णी ने कहा

दूसरी तरफ लेखक और भारतीय जनता पार्टी के विचारक सुधींद्र कुलकर्णी ने कहा कि पूर्ण स्वतंत्रता का इस्तेमाल जिम्मेदारी के साथ ही किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस तरह की कोई स्वतंत्रता नहीं होती जो किसी धर्म को नीचा दिखाए, यह जानते हुए कि इससे भावनाएं आहत होंगी और दूसरों का अपमान होगा। मैं इस बात से पूरी तरह असहमत हूं कि लेखक के पास बिना शर्त पूरी स्वतंत्रता होनी चाहिए। स्वतंत्रता का इस्तेमाल जिम्मेदारी के साथ किया जाना चाहिए। थोड़ी असहिष्णुता हमेशा से भारतीय समाज में रही है। इसलिए यह सही नहीं है कि 'इस या उस पार्टी' को इसके लिए दोषी बताया जाए।