यहां पर परंपरा के नाम पर कर देते हैं घर के बुजुर्गों की हत्या

नई दिल्‍ली (6 फरवरी): दुनिया के कई देशों में ऐसी परंपरा है, जिनके बारे में जानकर हम हैरान रह जाते हैं। लेकिन हमारे भारतवर्ष में भी बहुत से ऐसी परंपरा मौजूद हैं, जिनके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। ऐसी ही एक परंपरा तमिलनाडु की 'ठलाईकूठल' है, जिसके तहत घर के ही लोग बुजुर्गों को अपने हाथों से मार डालते हैं।

हैरानी की बात ये है कि बैन के बावजूद तमिलनाडु में ये परंपरा निभाई जाती है। हत्या का ये रूप समाज की नजरों में है अलविदा कहने का सम्मानजनक तरीका। बुजुर्गों की हत्या कर देने वाली ये परंपरा को समाज की नजर में विदाई देने का एक सम्मानजनक तरीका है। इसके तहत जो परिवार बुजुर्गों की सेवा नहीं कर पाता, वो इस परंपरा के नाम पर उनकी हत्या कर देता है। कभी-कभी तो बुजुर्ग खुद ऐसा करने को कहते हैं। हालांकि, जब ये परंपरा निभाई जाती है, तब ध्यान रखा जाता है कि पुलिस को इसकी भनक भी न लगे।

कब निभाई जाती है ये परंपरा: जब किसी बुजुर्ग को कोई लाइलाज बीमारी हो जाए तब निभाई जाती है। गरीबी की वजह से किसी बुजुर्ग का इलाज न करवाया जा सके। बुजुर्ग की सेवा करने का समय न हो किसी के पास। जब बुजुर्ग परिवार वालों को बोझ लगने लगता है।

कैसे की जाती है बुजुर्गों की मौत: बुजुर्ग को मिट्टी मिला पानी पिलाया जाता है, जिससे पेट खराब हो जाता है और उसकी मौत हो जाती है। इसे सबसे दर्दनाक तरीका माना गया है। सुबह-सुबह इनको तेल से नहलाने के बाद पूरे दिन कई ग्लास नारियल पानी पिलाया जाता है, जिससे गुर्दे ख़राब हो जाते हैं। ऐसे में बुजुर्ग की दो दिन के अंदर ही मौत हो जाती है। दूसरे तरीके में बुजुर्ग को ठंडे पानी से नहलाया जाता है ताकि उसे हार्ट अटैक आ जाए। कभी-कभी तो नाक बंद करके दूध पिलाया जाता है, जिससे तुरंत सांस रुक जाती है।