तमिलनाडु की राजनीति में फिर उथल-पुथल, शशिकला दे सकती हैं इस्तीफा

नई दिल्ली ( 18 अप्रैल ): तमिलनाडु की राजनीति में सोमवार देर रात एक बार फिर राजनीतिक ड्रामे के शुरुआत हो गई। तमिलनाडु में एआईएडीएमके के पन्नीरसेलवम और दिनाकरन गुट के विलय की संभावना तेज हो गई है। देर रात हुए घटनाक्रम में एआईएडीएममके पार्टी के 25 विधायकों ने एक बैठक करने के बाद मंगलवार को विधायक दल की आपात बैठक बुलाने का फैसला किया है।


दोनों गुटों में विलय की संभावना को लेकर तमिलनाडु के 25 मंत्री सोमवार देर रात बिजली मंत्री के थंगमनी के घर पर जुटे और पूर्व मुख्यमंत्री पन्नीरसेलवम के बयान का स्वागत किया। उन्होंने उम्मीद जताई की दोनों गुटों के फिर से मिल जाने पर पार्टी में और मजबूती आएगी।


पलानीस्वामी सरकार में शामिल कुछ मंत्री और वरिष्ठ नेताओं ने पूर्व मुख्यमंत्री पन्नीरसेल्वम से मुलाकात की है। बताया जा रहा है कि रविवार को राज्य के मंत्रियों ने पन्नीरसेल्वम से उनके घर पर मुलाकात की।


माना जा रहा है कि शशिकला की पार्टी एआईएडीएमके और ओ पन्नीरसेल्वम की पार्टी एआईएडीएमके पुराची थलाइवी अम्मा का विलय हो सकता है। यह भी कयास लगाया जा रहा है कि इस विलय के साथ ही शशिकला एआईएडीएमके के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे सकती हैं।


एआईएडीएमके के नेता डी जयकुमार ने कहा, 'शशिकला के पार्टी चीफ के पद से त्यागपत्र देने की संभावनाओं के बारे में हमें कोई जानकारी नहीं है। हमारी पार्टी के 123 विधायकों का यह मत है कि दोनों गुटों को फिर एक साथ आना चाहिए। हमे अपना पुराना दो पत्तों वाला चुनाव चिन्ह भी वापस पाना होगा। एक साथ आकर हम ऐसा कर सकते हैं।'


डी जयकुमार ने कहा कि कैडर का मानना है कि पार्टी नेतृत्व की समस्या खत्म हो गई है और अब सब मिलकर काम करेंगे। डी जयकुमार के अनुसार सीएम ए पलानीसामी ने मंगलवार को विधायकों की बैठक बुलाई है।


बता दें कि सोमवार को ही एआईएडीएमके के जनरल सेकेट्ररी और शशकिला के भतीजे टीटीवी दिनाकरन के खिलाफ दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच ने पार्टी के चुनाव चिह्न के लिए कथित तौर पर घूस देने के मामले में मुकदमा दर्ज किया।


दिनाकरन के खिलाफ पुलिस ने आईपीसी की धारा 170 और 120बी के तहत मामला दर्ज किया है। दिनाकरन पर आरके नगर उपचुनाव से पहले एआईएडीएमके पार्टी चुनाव चिन्ह को लेकर रिश्वत देने का आरोप है।


जयललिता की मौत के बाद तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री ओ पनीरसेल्वम और जयललिता की करीबी रही वीके शशिकला के बीच पार्टी पर एकाधिकार को लेकर विवाद बढ़ने के बाद चुनाव आयोग ने पार्टी का चुनाव चिह्‌न सीज कर दिया था।