नौकरी के लिए काहिरा गया, बिना किडनी के वापस लौटा

नई दिल्ली(23 नवंबर):  तमिलनाडु की राजधानी चेन्नै का एक शख्स इंटरनैशनल किडनी रैकेट का शिकार हुआ है। 29 साल के यासीर अहमद बाशा के मुताबिक, '2011 में पत्नी की बीमारी के इलाज के लिए करीब 7 लाख का कर्ज लिया था। सिर्फ ऑटो चलाकर इतना पैसा नहीं जुट पा रहा था कि परिवार के खर्च के साथ कर्ज का पैसा भी वापस कर सकूं। ऐसे में मैं अधिक कमाने की लालच में 2014 में मुंबई चला गया। यहां भी कैब चलाने से अच्छी आमदनी नहीं हो रही थी तो मैं नई नौकरी की तलाश में जुट गया।' 

इसी नौकरी की तलाश के दौरान यासीर धीरे-धीरे इंटरनैशनल किडनी रैकेट की जाल में फंसते चले गए। हालांकि उसे तब इस बारे में कोई जानकारी नहीं थी। यासीर ने बताया, 'नौकरी ढूंढ़ते हुए मैं इंटरनेट पर अहमदाबाद स्थित शिक्षा कंसल्टेंसी के संपर्क में आया। किडनी रैकेट का मास्टरमाइंड सुरेश प्रजापति ही इस संस्था को चला रहा था।' 

यासीर ने बताया कि जब वह पहली बार अहमदाबाद गया तो उन्हें ब्लड सैंपल देने के लिए कहा गया। जब उन्होंने इसके बारे में पूछताछ की तो बताया गया कि इंटरनैशनल कंपनी में नौकरी के लिए इसकी जरूरत होती है। इसके बाद उसे काहिरा भेज दिया गया। याशिर के मुताबिक काहिरा में बड़ी चालाकी से उसे किडनी रैकेट की जाल में फंसा लिया गया। यासीर को कैब चलाने के नाम पर काहिरा भेजा गया था लेकिन वहां किडनी बेचने के लिए मजबूर कर दिया गया। 

यासीर अब स्वदेश लौटकर दोबारा जिंदगी को पटरी पर लाने की कोशिश में जुटे हैं। हालांकि वह परिवार से दूर रह रहे हैं क्योंकि उन्हें डर है कि साथ रहने पर किसी दिन उनकी पत्नी इस सच्चाई को जान जाएंगी कि वह अपनी किडनी गवां चुके हैं।