श्रीलंका में अब तमिलों को भी समान अधिकार

नई दिल्ली (10 जनवरी): श्रीलंका की संसद में संविधान संशोधन का प्रस्ताव और तमिलों को बराबरी का दर्जा दिये जाने की कोशिशों को भारत की विदेश नीति का प्रभाव माना जा रहा है। भारत के प्रयासों के बाद श्रीलंका सरकार यिस बात पर राजी हो गयी थी कि तमिलों को भी सिंहलियों की तरह के सभी अधिकार दिये जाने चाहिए। तमिलों को समान अधिकार मिल जाने से लगभग तीन दशक से चली आ रही समस्या का हल हो जायेगा।

श्रीलंका की संसद में पेश किये गए प्रस्ताव के मुताबिक, नये संविधान में मौलिक अधिकारों और स्वतंत्रता की गारंटी देने के साथ जिम्मेदार और जवाबदेह सरकार के गठन की बात कही गयी है। हालांकि कुछ विपक्षी दलो ने आरोप लगया कि सरकार पश्चिमी देशो के दबाव में बौद्ध धर्म को कमजोर करने के लिए यह कदम उठा रही है लेकिन सरकार ने विपक्ष के इस दलील को खारिज कर दिया। राष्ट्रपति सिरिसेना ने कहा कि देश के दक्षिणी और उत्तरी इलाके में चरमपंथियों के कारण हजारों नौजवनों की जान गयी है। हमें सुलह और सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी ताकि फिर से संघर्ष की स्थिति न बने।