दलित कहलाना पसंद नहीं, देवेंद्र कुला वेल्लालर समुदाय को नहीं चाहिए आरक्षण

पल्लवी झा, नई दिल्ली (7 मई): देश में एकतरफ आरक्षण के लिए विभिन्न जातियां सड़क से लेकर संसद तक संघर्ष कर रही है, ऐसे में तमिलनाडु की एक जाति है जोकि आरक्षण छोड़ने के लिए आमादा है, आंदोलित है। देवेंद्र कुला वेल्लार समुदाय के ये लोग एससी क्लास में आते है यानी सरकार की सूची के मुताबिक ये लोग दलित है, लेकिन जमीनी हकीकत ये है कि इन्हें दलित कहलाना पसंद नहीं।इस जाति के लोगों का कहना है कि दलित समुदाय से होने के कारण समाज मे इनके साथ दोयम दर्जे का व्यवहार किया जाता है और ऐसे में इनके आत्मसम्मान को धक्का पहुचता है। लिहाजा इन्हें आरक्षण नहीं बल्कि आत्मसम्मान पसंद है।इस आंदोलन को समर्थन देने वाली पार्टी के नेता के कृष्णासामी का कहना है कि अनुसूचित जाति में होने के कारण इस समुदाय के लोगों के साथ अछूत की तरह व्यवहार किया जाता है, जिससे समुदाय के लोग खुद को अपमानित महसूस करते है। उनकी पहचान अनुसूचित जाति के रूप में की जाती है और वे अपनी इस पहचान को समाप्त करना चाहते हैं।इस आंदोलन को राष्ट्रीय समर्थन देने वाली यूथ फ़ॉर इक्वलिटी के नेताओं ने इस यूनिक आंदोलन को देशव्यापी बनाने का ऐलान किया है। इस जातीय और राजनीतिक सम्मेलन में पास हुए प्रस्ताव के मुताबिक इस लड़ाई को ये लोग अब न सिर्फ चेन्नई और दिल्ली में बल्कि यूएन तक ले जाने के मूड में हैं।