कश्मीर: तालिबान स्टाइल में काम करे रहे आतंकी

नई दिल्ली(27 अक्टूबर): पाकिस्तान और अफगानिस्तान में जिस तरह तालिबान ने स्कूलों को निशाना बनाया उसी तरह का हमला कश्मीर के स्कूलों पर भी हो रहा है। कश्मीर में सक्रिय आतंकी संगठन और अलगाववादी लगातार स्कूलों को निशाना बना रहे हैं। हमलों से वे लगातार स्कूलों को बंद रखने की नापाक कोशिश में लगे हुए हैं।

- आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक कश्मीर में आशांति के पिछले 3 महीनों के दौरान आतंकियों ने 17 सरकारी स्कूल ध्वस्त किए हैं। इसके अलावा 3 प्राइवेट स्कूलों को भी नेस्तानाबूद किया गया है। 8 जुलाई को हिजबुल के कमांडर बुरहान वानी के एनकाउंटर के बाद से ही कश्मीर अशांत है।

- इस दौरान घाटी के स्कूल पूरी तरह से बंद रहे हैं। अधिकारियों के मुताबिक घाटी में करीब 20 लाख बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। हालांकि सीमा क्षेत्रों जैसे गुरेज, तंगधार, उड़ी और जम्मू-लद्दाख में स्कूल ठीक से चल रहे हैं। अलगाववादियों का हस्तक्षेप भी कश्मीर घाटी तक ही सीमित है।

- पाकिस्तान समर्थित पत्थरबाज ब्रिगेड ने मंगलवार को दो और सरकारी स्कूलों को आग के हवाले किया। इसमें एक श्रीनगर शहर के नूरबाग इलाके और दूसरा अनंतनाग जिले के ऐशमुकाम का स्कूल है। हुर्रियत के अलावा दूसरे अलगाववादी-आतंकी समूहों के आह्वान के बाद स्कूल बंद चल रहे हैं।

-आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा तो जम्मू-कश्मीर के शिक्षा मंत्री नईम अख्तर को इसके लिए बकायदा धमका भी चुका है। मंत्री को स्कूल खोलने की कोशिश पर धमकाया गया था। 27 सितंबर को यह धमकी तब दी गई थी जब स्कूलों और कॉलेजों को खुलवाने का प्रयास किया जा रहा था।

-लश्कर के प्रवक्ता अब्दुल्ला गजनवी ने ऑपरेशन चीफ महमूद शाह का हवाला देते हुए कहा था कि कश्मीरी खुद इतने पढ़े-लिखे हैं कि अपना अच्छा-बुरा सोच सकते हैं। धमकी में कहा गया कि अगर नईम नहीं माने तो लश्कर उनके खिलाफ कार्रवाई करेगा।

-बाद में नईम अख्तर ने अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी को एक खुला खत लिखा था। इसमें शैक्षणिक संस्थानों को चलते रहने देने की बात कही गई थी। पर अलगाववादी नेताओं और आतंकी सगंठनों पर इसका कोई असर नहीं पड़ा। हालात अब ऐसे हैं कि सैकड़ों माता-पिता अपने बच्चों को पढ़ाई के लिए जम्मू और दिल्ली भेजने को मजबूर हो रहे हैं।