चीन-पाक ने मुंह की खायीः अफगान सरकार और तालिबान में शांति वार्ता

नई दिल्ली (18 नवंबर): तालिबान के आतंकियों का अब अपने आका पाकिस्तान से विश्वास उठता नजर आ रहा है। कुख्यात गुलबुद्दीन हिकमतयार के बाद बाकी तालिबान संगठन भी अफगानिस्तान सरकार के साथ समझौता करने की कोशिश कर रहे हैं। अभी तक तालिबानी आतंकियों के सहारे अफगानिस्तान को अस्थिर कर अमेरिका और भारत पर दवाब बनाने की कोशिश करने वाले पाकिस्तान और चीन के पैरों तले जमीन खिसक गयी है।

ब्रिटेन के एक अखबार गार्जियन की रिपोर्ट के मुताबित अफगानिस्तान सरकार और तालिबानों के साथ यह बैठक क़तर में हुई है। इस बैठक में अफगान सरकार के साथ तालिबान के संस्थापक मुल्ला मोहम्मद उमर के भाई मुल्ला अब्दुल मन्नान ने बातचीत शुरु की है। बताया जाता है कि तालिबान और अफगान सरकार के बीच दो राउंड बातचीत हो चुकी है। इस बातचीत को अमेरिका का समर्थन भी है। अमेरिका ने कहा है कि अगर तालिबान अफगान शांति प्रक्रिया में शामिल होते हैं तो उन्हें सम्मान दिया जायेगा और उनके खिलाफ कार्रवाई रोक दी जाएगी।

क़तर में अफगान सरकार और तालिबान की इस सकारात्मक वार्ता से पाकिस्तान के हाथ से तुरुप का पत्ता खिसक गया है। अभी कुछ दिन पहले ही पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ ने कहा था कि कश्मीर में शांति का रास्ता अफगानिस्तान की गलियों से जाता है। पाकिस्तान इस तरह दवाब बनाकर अफगानिस्तान में अपने आतंकियों को बचाना चाहता था। जिसे अमेरिका ने सिरे से नकार दिया था।