अफगानिस्तान-तालिबान की कतर में सीक्रेट मीटिंग, पाक को नहीं 'पूछा'

नई दिल्ली(19 अक्टूबर):तालिबान और अफगान सरकार के बीच 5 महीने बाद शांति वार्ता फिर शुरू हो गई है। दोनों पक्षों के बीच कतर के दोहा में अक्टूबर और नवंबर में दो दौर की बातचीत हो चुकी है। लेकिन सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इन मीटिंग से पाकिस्तान को दूर रखा गया है। 

- बता दें कि मई 2016 में अफगानिस्तान और तालिबान के बीच शांति वार्ता टूट गई थी। हालांकि, अफगानिस्तान सरकार ने सीक्रेट मीटिंग से इनकार किया है। 

- इस मीटिंग में अमेरिकन डिप्लोमैट, पूर्व तालिबान चीफ मुल्ला उमर का भाई मुल्ला अब्दुल मन्नान और अफगान के रिप्रेजेंटेटिव्स शामिल हुए।

- बताया जा रहा है कि ये मीटिंग यूएस ऑफिशियल की मदद से हुई हैं, क्योंकि पहले तालिबान सीधे सरकार से बात करने पर अड़ा था।

- इससे पहले, मई 2016 में मुल्ला अख्तर मसूर की ड्रोन हमले में मौत के बाद दोनों पक्षों के बीच बातचीत टूट गई थी।

- इस रिपोर्ट के मुताबिक, सितंबर में हुई मीटिंग काफी पॉजिटिव रही।

- पिछले कुछ सालों से अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच रिलेशन अच्छे नहीं रहे हैं। दरअसल, पाकिस्तान नहीं चाहता कि भारत अफगानिस्तान में कोई भूमिका निभाए, लेकिन अफगानिस्तान को पाकिस्तान की कोई शर्त मंजूर नहीं है।

- अफगानिस्तान पाकिस्तान पर आतंकियों को मदद देने का आरोप लगाता रहा है। इसके अलावा कई मामले एेसे हैं, जिनकी वजह से पाकिस्तान को बातचीत से दूर रखा गया है।

- यूएस और अफगानिस्तान का आरोप है कि पाकिस्तान तालिबान को नेगोशिएशन टेबल पर आने से रोकता है।

- अफगान प्रेसिडेंट अशरफ घानी के एक करीबी ने बताया- "अफगानिस्तान सरकार और तालिबान पाकिस्तान के रवैया से निराश है। इस्लामाबाद दोनों के साथ डबल डीलिंग कर रहा है। दोनों पक्ष अब पाकिस्तान की जरूरत को महसूस नहीं करते हैं।"

- हालांकि, पाकिस्तान इन आरोपों से इनकार करता रहा है।