250 किमी की रफ्तार से चलने वाली टेलगो ट्रेन का मथुरा में सफल ट्रायल

नई दिल्ली (9 जुलाई): ढाई सौ किलोमीटर की रफ्तार से चलने वाली इस टेलगो ट्रेन का मथुरा में ट्रायल रन हुआ है। मथुर से पलवल के बीच इस टेलगो ट्रेन का ट्रायल कामयाब रहा है। इस दौरान यह ट्रेन 12 बजकर 40 मिनट पर मथुरा से रवाना हुई। टेल्गो ट्रेन में दो क्लास कार, चार चेयर यान, एक कैफेटेरिया के अलावा भी कई चीजें हैं। इसे 4,500 हॉर्सपॉवर के डीजल इंजन से खींचा गया।

अपनी बेजोड़ खूबियों की वजह से ही टेलगो ट्रेन अमेरिका और रूस समेत कई देशों में हिट साबित हुई है। केवल भारत ही नहीं बल्कि दुनिया के कई देशों में टेलगो ट्रेन अपनी तकनीक और खूबियां का लोहा मनवा चुकी है। टेलगो ट्रेन अमेरिका, रूस समेत कई देशों में बेहद लोकप्रिय है।

सबसे पहले बात ट्रेन के सुविधाजनक डिब्बों की.... टेलगो ट्रेन के डिब्बे में काफी जगह है। जगह ज्यादा होने की वजह से कोच की चेयर्स के बीच उचित दूरी है। जिससे यात्रियों को निकलने में सुविधा होती है। हाईस्पीड ट्रेन के कोच में बैठने के लिए एयरोप्लेन की तरह सीटें हैं तो वहीं सोने के लिए बेहद आरामदायक स्लीपर कोच भी हैं। इसके अलावा सामान रखने के लिए लिए भी पर्याप्त जगह है।

लगे हैं लो फ्लोर कोच टेलगो ट्रेन में छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखा गया है। ट्रेन में लो फ्लोर कोच लगे हुए हैं, जिससे यात्रियों को प्लेटफॉर्म से ट्रेन में चढ़ने-उतरने में काफी आसानी होती है। ये देखिए ट्रेन के रुकने पर जैसे ही कोच के दरवाज़े खुलते हैं। उसी समय नीचे से एक ऑटोमैटिक फूट स्टेप बाहर आ जाता है कि जिससे प्लेटफॉर्म और डिब्बे के बीच का गैप भर जाता है और हादसा होने की आशंका ख़त्म हो जाती है।

ट्रेन तकनीकी खूबियों से लैस है जो इस बेहतरीन, सुरक्षित और आरामदायक सफर का अहसास देती है। ट्रेन के कोच को बनाने में लाइटवेट कंस्ट्रक्शन तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। एल्युमिनियम से इसके कोच बने हैं।

कैसे जुड़े हैं दो कोच टेलगो ट्रेन में दो डिब्बों को जोड़ने के लिए भी खास तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। दो कोचों को जोड़ने वाली इस तकनीक को आर्टिकुलेटेड यूनियन तकनीक कहा जाता है। इसकी वजह से दो कोचों के बीच गैप न के बराबर होता है।

पहिये भी अलग जिन पहियों पर ये ट्रेन दौड़ती है वो भी औरों से अलग हैं। ट्रेन के पहियों में इंडिपेंडेंटे ब्हील और गाइडेड एक्सेल तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। इस तकनीक को काफी सुरक्षित माना जाता है और इससे ट्रेन हाइस्पीड में दौड़ने में भी सहूलियत होती है।

इस टेलगो की एक और बेमिसाल तकनीक इसे बाकी ट्रेनों से अलग करती है वो है इसका वेरिएबल गेज सिस्टम। इस सिस्टम की खासियत ये है कि ट्रेन के पहियों को एक ऐसी खास तकनीक से बनाया गया है कि ये गेज के हिसाब से चौड़े हो सकते हैं और सिकुड़ भी सकते हैं।

550 यात्री एक बार में कर सकेंगे सफर एक टेलगो ट्रेन की कैपिसिटी 550 यात्रियों को ले जाने की होती है। कंपनी का दावा है कि इस ट्रेन में सफर के दौरान दूसरे ट्रेनों के मुकाबले यात्रियों को कंपन काफी कम महसूस होता है। साथ ही इससे होने वाला ध्वनि प्रदूषण भी काफी कम होता है। टेलगो ट्रेन दूसरे ट्रेनों के मुकाबले काफी हल्की होती है, ऐसे में करीब 30 फीसदी बिजली की बचत होती है और चलाने का खर्च भी कम आता है।

टेलगो ट्रेन के तीन वर्जन हैं टेलगो 350, टेलगो 250 और टेलगो 250 डूअल। भारत में टेलगो 21 वर्जन के कोच आए हैं। इस वर्जन की रफ्तार 160-200 किमी प्रतिघंटा हो सकती है। टेलगो के कोच काफी हल्के हैं। हालांकि एक कोच को बनाने की कीमत करोड़ों में हैं।

टैलगो के एक कोच की करीब 3.25 करोड़ रुपए है। बताया जाता है कि भारत में दौड़ने वाली टेलगो ट्रेन में एसी चेयर कार, एग्जीक्यूटिव चेयर कार और पावर कार होंगी। इसमें कोई दो राय नहीं कि टेलगो ट्रेन सुविधा, सुरक्षा और स्पीड के मामले में बेमिसाल है। लिहाज़ा सबकी निगाहें इसके ट्रायल पर टिकी हैं।ट्रायल के नतीजों के बाद ही टेलगो ट्रेन का भारत में आगे का सफर तय होगा।