सफाईकर्मी का बेटा बना इस राज्य का हीरो, जर्मनी में सीखेगा फुटबॉल के गुर

नई दिल्ली (8अगस्त): कल तक जिस बच्चे के पास खेलने के लिए न जूते थे और और न ड्रेस वो अब जर्मनी में फुटबॉल के गुर सीखेगा। भविष्य में भारत का बड़ा फुटबॉलर बनेगा। उसे टाटा ट्रस्ट ने पूर्वोत्तर के 35 बच्चों के साथ जर्मनी भेजने का फैसला किया है। इस बच्चे का नाम है चंदन बोडो। पिता सफाई कर्मचारी हैं और रेल की पटरियों के पास एक छोटी सी बांस की झुग्गी है। जर्मनी की एक फुटबॉल अकादमी के लिए उसके सेलेक्शन के बाद उसकी झुग्गी के बाहर मीडिया वालों की भीड़ जुट गई।

चंदन असम के उदालगुड़ी जिले के हरिसिंगा गांव में रहता है। फुटबॉल प्रशिक्षण के लिए पूर्वोत्तर के मिज़ोरम, मणिपुर, मेघालय और असम से कुल 35 बच्चों का चयन किया गया है जिनकी उम्र आठ से 15 वर्ष है। इनमें चंदन की उम्र सबसे कम है और असम से चयनित होने वाला अकेला खिलाड़ी हैं। इन सभी बच्चों को जर्मनी के बिटबर्ग स्थित टाटा ट्रस्ट यू ड्रीम फुटबॉल अकादमी में छह साल की फेलोशिप के तहत फुटबॉल ट्रेनिंग दी जाएगी।