विदेशों से कचरा खरीद रहा है स्वीडन

नई दिल्ली (12 दिसंबर):  भारत में जहां देखो वहां कचरा ही कचरा नजर आता है और एक स्‍वीडन है जहां कचरा खत्‍म हो गया है। यहां कचरा दूसरे देशों से आयात किया जा रहा है। स्‍वीडन में जरुरत की आधी से ज्‍यादा बिजली कचरे से बनाई जाती है। यह दुनिया के उन पहले देशों में से एक है जिसने जैविक ईंधन के इस्‍तेमाल पर कड़ा टैक्‍स लगा रहा है। यहां पर साल 1991 से ही जैविक ईंधन के इस्‍तेमाल पर भारी टैक्‍स है। वहां का रिसाइकलिंग सिस्‍टम इतने परिष्‍कृत तरीके से काम करता है कि पिछले साल वहां पर घरों से निकले कुल कचरे का केवल एक प्रतिशत कचरा क्षेत्र में फेंका गया।

स्‍वीडन की कचरा प्रबंधन की रिसाइकलिंग संस्‍था की कंपनी अवफाल वेरिजे की कम्‍युनिकेशन डायरेक्‍टर एना केरिन ग्रिपवेल ने बताया, ”स्‍वीडिश लोग प्रकृति को लेकर काफी सतर्क हैं और वे जानते हैं कि प्रकृति और पर्यावरण से जुड़े मामलों के लिए क्‍या किया जाना चाहिए। हम लंबे समय से लोगों को कचरा बाहर ना फेंकने के लिए जागरूक करने के लिए काम कर रहे हैं जिससे कि कचरे को रिसाइकल और फिर से उपयोग में लाया जा सके।” स्‍वीडन ने मजबूत राष्‍ट्रीय रिसाइकलिंग नीति बना रखी है जिससे निजी कंपनियां कचरा निर्यात और जलाने को काम देखती है। इससे पैदा हुई ऊर्जा नेशनल हीटिंग नेटवर्क में जाती है जिससे कड़ी ठंड के दिनों में घरों में बिजली पहुंचाई जाती है।