स्वामी रामभद्राचार्य जी ने बताया क्या है 'श्रावण रहस्य', देखें सुधीर शुक्ला के साथ पूरी बातचीत

न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (9 अगस्त): चित्रकूट के तुलसी पीठ के संस्थापक और पद्म विभुषण से सम्मानित जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य जी महाराज से न्यूज24 के सुधीर शुक्ला ने बातचीत की।स्वामी रामभद्राचार्य जी चित्रकूट स्थित जगद्गुरु रामभद्राचार्य विकलांग विश्वविद्यालय के संस्थापक और आजीवन कुलाधिपति भी हैं। जगद्गुरु की दो महीने की आयु में ही आखों की रौशनी चली गई थी। कहा जाता है कि वह 22 भाषाओं के ज्ञाता है और संस्कृत, हिंदी, अवधि और मैथिली समेत कई भाषाओं में लेखन कर चुके हैं। उनकी गिनती नैसर्गिक कवियों में भी होती है।सुधीर शुक्ला ने स्वामी रामभद्राचार्य जी से पूछा कि उन्होंने बाल्मिकी रामायण, रामचरित मानस और अन्य ग्रंथों का अध्ययन कैसे किया। इस सवाल के जवाब में स्वामी जी ने बताया कि मेरे जन्म के दो माह बाद मेरे आंख की रोशनी चली गई थी। उन्होंने कहा कि मेरा जन्म हुआ था 14 जनवरी 1950 को और मेरे नेत्र बंद हुए 14 मार्च 1950 को। उन्होंने कहा कि मैं भी नहीं बता पा रहा हूं कि इतने ग्रंथ मुझे कैसे कंठस्थ हुए।उन्होंने कहा कि मेरा 69वां वर्ष चल रहा है। इस समय मुझे लगभग डेढ़ लाख पृष्ठ कंठस्थ हैं भारतीय संस्कृत के।जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य जी महाराज और सुधीर शुक्ला की पूरी बातचीत यहां देखें...