स्टेज सेट: आज सुषमा करेंगी पाक की बोलती बंद

नई दिल्ली(26 सितंबर): विदेश मंत्री सुषमा स्वराज आज संयुक्त राष्ट्र के अपने भाषण में पाकिस्तानी पीएम नवाज शरीफ की बोलती बंद कर सकती हैं।  साथ ही, स्वराज के अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद के खिलाफ व्यापक समझौते (सीसीआईटी) पर आम-सहमति बनाने के लिए जोर दिए जाने की भी उम्मीद है।

- मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक स्वराज के भाषण के जरिये भारत का इरादा आतंकवाद के खिलाफ लड़ने के लिए सीसीआईटी के रूप में ग्लोबल स्तर पर सहमति बनाना है। भारत ने 1996 में सीसीआईटी पर पहल शुरू की थी और इसमें मौजूद कानूनी ढांचे के मुताबिक इस पर हस्ताक्षर करने वाले सभी देशों के लिए आतंकवादी संगठनों को फंड और सुरक्षित ठिकाना मुहैया कराने से मना करना कानूनी बाध्यता होगी। हालांकि, पश्चिमी देशों और कुछ अन्य के साथ 'आतंकवाद' और 'आतंकवादी' की परिभाषा को लेकर मतभेद होने के कारण इस समझौते पर गतिरोध पैदा हो गया है।

- एक वेबसाइट के हवाले से अधिकारियों ने बताया कि इस तरह के कानूनी ढांचे को लेकर संयुक्त राष्ट्र संघ के सदस्यों के बीच आम राय बन रही है। उनके मुताबिक, इस पहल पर बात काफी आगे बढ़ी है और ज्यादातर पहलुओं पर सहमति है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सितंबर 2014 में संयुक्त राष्ट्र की आमसभा के 69वें सत्र में अपने संबोधन में सीसीआईटी की वकालत की थी। एक सीनियर अधिकारी ने बताया, 'आतंकवाद निश्चित तौर पर अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा है। इस समझौते से आतंकवादियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए कानूनी रास्ता मिल सकेगा।'

- एक और अधिकारी का कहना था कि सीसीआईटी पर पूरी तरह से सहमति बनाने के लिए भारत वोटिंग समेत सभी विकल्पों पर विचार कर रहा है। सीसीआईटी के मुताबिक, इसके सभी सदस्य देशों के लिए सभी आतंकवादी ग्रुपों पर पाबंदी लगाने और आतंकी कैंपों को बंद करना जरूरी होगा। साथ ही, स्पेशल कानून के मुताबिक, सभी आतंकवादियों पर कार्रवाई और सीमा-पार आतंकवाद को प्रत्यपर्ण से जुड़ा अपराध बनाने की भी बात है।

- सीसीआईटी के ड्राफ्ट पर फिलहाल संयुक्त राष्ट्र की छटी एडहॉक कमिटी विचार कर रही है, जिसे इसकी आमसभा ने बनाया है। संयुक्त राष्ट्र मामलों के एक एक्सपर्ट ने नाम जाहिर नहीं किए जाने की शर्त पर बताया, 'विकसित देशों द्वारा आतंकवाद के खतरे को गंभीरता से लेने से काफी पहले भारत ने सीसीआईटी के ड्राफ्ट का प्रस्ताव किया था। इसका मकसद आतंकवाद के खिलाफ सामूहिक कार्रवाई है।'