44 साल बाद कल लगेगा ऐसा सूर्य ग्रहण, जानिए क्या करें, क्या नहीं?

न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली ( 12 जुलाई ): साल का दूसरा आंशिक सूर्य ग्रहण 13 जुलाई 2018 को लगेगा। यह ग्रहण भारत में नहीं दिखेगा। यह सूर्यग्रहण आस्ट्रेलिया के सुदूर दक्षिणी भागों, तस्मानिया, न्यूजीलैंड के स्टीवर्ट आइलैंड, अंटार्कटिका के उत्तरी हिस्से, प्रशांत और हिंद महासागर में देखा जा सकेगा। इसलिए ग्रहण के नियम के अनुसार भारत में रहने वाले लोगों पर ग्रहण के सूतक का विचार नहीं होगा।


भारत और पड़ोसी देशों में इसे नहीं देखा जा सकेगा। सूर्य ग्रहण देखा नहीं जाएगा, अतः सूतक आदि के नियम लागू नहीं होंगे। भारत के लोगों को ग्रहण के दौरान किए जाने वाले नियमों के पालन की जरूरत नहीं। इसलिए अफवाहों और बेकार की बातों पर ध्यान देनें की जरूरत नहीं है।

भारतीय समय के अनुसार, यह प्रातः  07.18 से शुरू होकर प्रातः 09.43 तक समाप्त होगा। इस ग्रहण की कुल अवधि लगभग 02 घंटे 25 मिनट की है। ग्रहण के समय से 12 घंटे पहले सूर्य ग्रहण का सूतक काल शुरू हो जाता है। चंद्रग्रहण का सूतक ग्रहण से 10 घंटे पहले आरंभ होता है।

इस बार सूर्य ग्रहण 13 तारीख और दिन शुक्रवार को पड़ रहा है। ऐसा योग पूरे 44 साल बाद आया है। अब शुक्रवार और 13 तारीख के मेल वाला यह सूर्यग्रहण 13 सितंबर 2080 में लगेगा।

आइए जानते हैं सूर्य ग्रहण लगने पर क्या करना चाहिए।


जिन जगहों पर दिखेगा ग्रहण, वहां पर रहने वाले भारतीयों को क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए...

-ग्रहण काल के समय मानसिक जप करना चाहिए, ध्यान लगाना चाहिए या मौन साधना कर सकते हैं। इस दौरान पूजा नहीं करनी चाहिए और भगवान की मूर्ति या तस्वीर को नहीं छूना चाहिए।

-गर्भवती स्त्रियों को ग्रहण के दौरान बाहर नहीं निकलना चाहिए। वह कमरे में रहें और मानसिक जप या ध्यान करें।

-ग्रहण के दौरान खाने की सभी चीजों में तुलसी के पत्ते डाल दें।

-खाली आंखों से ग्रहण को नहीं देखना चाहिए। इसके लिए उपयुक्त लैंस या चश्में का इस्तेमाल करें। आप घर में रखी एक्स-रे फिल्म को आंखों के आगे रखकर भी ग्रहण देख सकते हैं। साथ ही आप सोलर फिल्टर या सलर व्यूअर का भी प्रयोग कर सकते हैं।

-ध्यान रखें, जिस भी माध्यम से आप ग्रहण को देख रहे हों चाहे वह एक्स-रे फिल्म हो या ग्लास, उसमें स्क्रैच नहीं होने चाहिए।

-सूर्य ग्रहण की फोटो क्लिक करना चाहते हैं तो किसी एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें। अन्यथा आंखों को नुकसान हो सकता है।

-ग्रहण काल के बाद किसी पवित्र नदी या ताजे जल से स्नान करना चाहिए।

-स्नान के बाद दान-पुण्य करने का विधान हमारी संस्कृति में है।