महाभियोग खारिज होने पर बोली कांग्रेस- 'सभापति के पास मेरिट तय करने का अधिकार नहीं'

नई दिल्ली (23 अप्रैल): उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट के CJI दीपक मिश्रा के खिलाफ महाभियोग के प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। आपको बता दें कि कांग्रेस की अगुवाई में 7 विपक्षी पार्टियों ने उपराष्ट्रपति के सामने ये प्रस्ताव पेश किया था, लेकिन कानूनी सलाह के बाद वेंकैया नायडू ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। 

Vice President M Venkaiah Naidu rejects the Impeachment Motion against CJI Dipak Misra. pic.twitter.com/Bz53ikvAwh

— ANI (@ANI) April 23, 2018             

इस बीच कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने ट्वीट कर उपराष्ट्रपति पर ही निशाना साधा है। सुरजेवाला ने ट्वीट कर कहा कि महाभियोग लाने के लिए 50 सांसदों की जरूरत होती है, जो हमने पूरा किया। राज्यसभा चेयरमैन प्रस्ताव की मेरिट तय नहीं कर सकते हैं। अब ये लड़ाई सीधे तौर पर लोकतंत्र को बचाने वाले और लोकतंत्र को खारिज करने वालों के बीच में है। 

Constitutional process of impeachment is set in motion with 50 MP’s giving the motion. RS Chairman can’t adjudge the motion, for he has no mandate to decide the merits of the motion. This is truly a fight between forces ‘Rejecting Democracy’ & voices ‘Rescuing Democracy’. 1/3

— Randeep Singh Surjewala (@rssurjewala) April 23, 2018

उन्होंने ट्वीट में लिखा कि प्रस्ताव आने के कुछ ही समय में वित्त मंत्री ने इसे रिवेंज पेटीशन बताया था जो कि राज्यसभा चेयरमैन के फैसले को प्रभावित करने वाला बयान था। राज्यसभा चेयरमैन प्रशासनिक शक्ति के अभाव में इस तरह का फैसला नहीं ले सकते हैं।

2/3 Within hours of 64 MP’s submitting the impeachment motion, Leader of Rajya Sabha(FM) had expressed naked prejudice by calling it a ‘revenge petition’ virtually dictating the verdict to Rajya Sabha Chairman on that day. Has ‘Revenge Petition’ now become ‘Rescue Order’?

— Randeep Singh Surjewala (@rssurjewala) April 23, 2018

सुरजेवाला ने एम. कृष्णा स्वामी केस का हवाला दिया। सुरजेवाला ने लिखा कि अगर सभी आरोप जांच से पहले ही खारिज हो जाएं तो संविधान और जज इन्क्वाएरी एक्ट का कोई मतलब नहीं रहता है।

 

3/3 RS Chairman can’t decide on merits in absence of quasi judicial or administrative power (M.Krishna Swami’s case). If all charges were to be proved before inquiry as RS Chairman suggests, Constitution & Judges (Inquiry) Act will have no relevance. Don’t muzzle Constitution

— Randeep Singh Surjewala (@rssurjewala) April 23, 2018