सर्जिकल स्ट्राइक के दस्तावेज आए सामने, जानिए बहादुर सैनिकों ने दुश्मनों को कैसे दी मात

नई दिल्ली ( 31 जनवरी ): पिछले साल सितम्बर के महीने में भारतीय सेना की पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में सर्जिकल स्ट्राइक की कार्रवाई की विस्तृत जानकारी अब सामने आई है। इसके अनुसार जो जवान और अफसर इस कार्रवाई में शामिल थे उनके बारे में ब्यौरा दिया गया है। इस कार्रवाई में शामिल रहे छह जवानों को गणतंत्र दिवस पर वीरता पुरस्कारों से सम्‍मानित किया गया। इसमें कीर्ति चक्र भी दिया गया। कीर्ति चक्र शांतिकाल का दूसरा सबसे बड़ा वीरता पुरस्कार है। हालांकि सुरक्षा कारणों से पुरस्कार हासिल करने वाले जवानों के नाम सार्वजनिक नहीं किए गए हैंएक अंग्रजी अखबार के मुताबिक इसी डिटेल्स के आधार पर वीरता मेडल दिए गए। वीरता पुरस्‍कार पाने वाले छह जवानों ने आमने-सामने की लड़ाई में कम से कम 10 दुश्‍मनों को खत्‍म किया। इससे मेडल हासिल करने वाले सैनिकों की बहादुरी का खाका खींचा जा सकता है। इनमें से अधिकतर ने नजदीकी लड़ाई में दुश्मनों को ठिकाने लगाया। पहली बार आधिकारिक रिकॉर्ड बताते हैं कि इस हमले में आतंकियों के साथ-साथ पाकिस्तानी सेना को भी जानमाल का बड़ा नुकसान पहुंचा था।अब जो जानकारी आई है उसके मुताबिक दो अधिकारियों ने खुद चार-चार को मारा। वीरता पुरस्कार पाए एक सैनिक के बारे में रिकॉर्ड में दर्ज है, 'सैनिक अपने सहयोगी के साथ दुश्मन के ठिकाने पर पहुंचा और उसने खुले में दो संतरियों को मार गिराया। उसने यह सुनिश्चित किया कि पूरा ऑपरेशन बिना बाधा के पूरा किया जा सके। सैनिक ने चार दुश्मनों को नजदीकी लड़ाई में मार गिराया।' आगे लिखा है, 'सैनिक ने निर्णायक सोच, दृढ़ संकल्प और अदम्य साहस का परिचय देते हुए चार दुश्मनों को ठिकाने लगाया और यह सुनिश्चित किया कि कोई दुश्मन मौके से भाग न पाए।'डिटेल्स से पता चलता है कि भारतीय सेना के अफसरों न केवल सामने से टीम का नेतृत्व किया बल्कि दुश्मनों के सामने कम संख्याबल के बावजूद साथी सैनिकों को बहादुरी के साथ लड़ने के लिए प्रेरित किया। वीरता पुरस्कार पाने वाले एक अफसर के बारे में लिखा है, 'आतंकियों और उनका साथ दे रहे दुश्मनों की तीखी जवाबी प्रतिक्रिया के बावजूद वह दुश्मनों से मोर्चा लेते रहे। इसके साथ ही वह अपनी टुकड़ी को दुश्मनों के ठिकानों को खत्म करने के लिए प्रेरित करते रहे।' आगे लिखा है, 'उनकी आक्रामकता और लगातार प्रेरणा से उनके लोगों ने कम संख्याबल होने के बावजूद जोरदार तरीके से दुश्मन पर हमला किया और उन्हें मानसिक तौर पर पंगु कर दिया।'वहीं, एक सैनिक की बहादुरी का भी रिकॉर्ड में जिक्र है, जिसने अपने सहयोगियों को मुश्किल में देख सामने से हो रही फायरिंग की ओर ही दौड़ पड़ा ताकि दुश्मनों का ध्यान उस पर आ जाए। रिकॉर्ड में लिखा है, 'अनुभवी सैनिक ने जब यह देखा कि उसके पक्ष को जानमाल का नुकसान हो सकता है, तो उसने मौके की नजाकत को समझते हुए खुद की सेफ्टी को ताक पर रखकर फायरिंग कर रहे दुश्मनों की ओर दौड़ पड़ा और दो दुश्मनों को गोलियों से भून डाला।'हमला करने वाली टीम के कमांडर ने सामने ने नेतृत्व किया। उसने लक्ष्य पर पहुंचकर पहरा दे रहे दो दुश्मनों को सामने से चुनौती देकर ठिकाने लगाया। इसके बाद, जंगल में छिपी अपनी टीम को आदेश दिया कि वह मुख्य लक्ष्य पर हमला करे। बिना किसी व्यवधान के मिशन को अंजाम दिया गया। नजदीकी लड़ाई में दुश्मन के चार लक्ष्यों को तबाह कर दिया गया।