जरूरत पड़ी तो फिर करेंगे सर्जिकल स्ट्राइक: सेना

नई दिल्ली(15 अक्टूबर): संसद की डिफेंस स्टैंडिंग कमिटी से सेना ने सर्जिकल स्ट्राइक से जुड़ी जानकारियां शेयर की हैं। सेना ने नेताओं को बताया कि भारतीय फौज की टुकड़ी ने किस तरह लाइन ऑफ कंट्रोल पार करके सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम दिया। यह भी कहा कि अगर हालात नहीं बदले तो ऐसा दोबारा किया जा सकता है। 

- सर्जिकल स्ट्राइक के 'सबूतों' को लेकर हो रही राजनीति के बीच इस घटनाक्रम को बेहद अहम माना जा रहा है।

- ऐसा पहली बार है, जब सांसदों को सर्जिकल स्ट्राइक के बारे में आधिकारिक तौर पर जानकारी दी गई है। 

- इससे पहले भारतीय डीजीएमओ ने बयान जारी करके पहली बार इस जवाबी हमले की सार्वजनिक घोषणा की थी। बाद में केंद्र सरकार ने ऑल पार्टी मीटिंग के जरिए विभिन्न दलों को इस बारे में बताया था।

- आर्मी वाइस चीफ लेफ्टिनेंट जनरल विपिन रावत ने संसदीय कमिटी को बताया कि कमांडो ऐक्शन के पहले इस बात की जानकारी मिली थी कि एलओसी के पार बने लॉन्च पैड्स पर आतंकवादी मौजूद हैं। उनका मकसद जम्मू-कश्मीर में कई लक्ष्यों को निशाना बनाना था। विपिन रावत ने कमिटी को बताया कि भले ही भारत ने कार्रवाई के बाद पाकिस्तानी डीजीएमओ को जानकारी दी हो, लेकिन भविष्य के हालात पर बहुत कुछ निर्भर करेगा। अगर पाकिस्तान अपनी जमीन का इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों के लिए न होने देने का वादा पूरा नहीं करता तो ऐसा कदम दोबारा उठाया जा सकता है।

- कमिटी की बैठक से पहले कुछ विवाद भी हुआ। आर्मी की ब्रीफिंग का कार्यक्रम तय होने के बाद बाद में रद्द किए जाने को लेकर कांग्रेस ने प्रदर्शन किया था। शुक्रवार सुबह एक बार फिर अजेंडा बदला और लेफ्टिनेंट जनरल रावत ने सांसदों से मुलाकात की। रावत ने पूरे ऑपरेशन की जानकारी सांसदों को दी। यह भी बताया कि आतंकी कैंपों को कितना नुकसान हुआ और भारत में घुसपैठ के लिए कितने आतंकी उन लॉन्च पैड्स पर इकट्ठा हुए थे। रावत के मुताबिक, मिशन को अंजाम देकर सभी भारतीय सैनिक सुरक्षित वापस लौट गए।

-अफसर ने कहा कि सेना का मिशन आत्मरक्षा के लिए था। सेना को इस बात के पक्के सबूत मिले थे कि आतंकी विभिन्न जगहों से भारत में घुसपैठ करने वाले हैं, और बड़ा नुकसान पहुंचाने की फिराक में हैं।  - कमिटी के सदस्यों को बताया गया कि इस साल हुए पठानकोट हमले के बाद से ही सैन्य कार्रवाई के विकल्प के बारे में विचार किया जा रहा था। उड़ी के हमले ने सेना को इस विकल्प का इस्तेमाल करने के लिए मजबूर कर दिया। कमिटी के चेयरमैन ने बताया, 'वाइस चीफ की ओर से दी गई जानकारी से अधिकतर सदस्य संतुष्ट थे इसलिए कोई सवाल नहीं पूछे गए।'